सहारनपुर। पांवधोई नदी को बचाने का बीड़ा उठाने वालों ने ही नदी को गंदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पांवधोई नदी को साफ करने के लिए शनिवार को शुरू हुए महाअभियान के अगले दिन घाट और उद्गम स्थल पर प्लास्टिक के डिस्पोजल हजारों की संख्या में बिखरे नजर आए। इससे एक ओर जहां स्वच्छ भारत मिशन को झटका लगा है, वहीं प्लास्टिक पर बैन भी बेमानी साबित हुआ है। नदी को शहर की लाइफ लाइन बताने वाले लोग गंदगी को नदी के तट पर ही छोड़ गए।
पांवधोई नदी की सफाई के लिए शनिवार को शुरू किए गए महाअभियान की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला ने रविवार को नदी का लाइव किया। अमर उजाला की टीम जब गांव शकलापुरी स्थित उद्गम स्थल पर पहुंची तो नजारा हैरान करने वाला था। यहां चारों ओर गंदगी फैली थी, गौरतलब है कि शनिवार को शकलापुरी में उद्गम स्थल पर खेत में बड़ा टेंट लगाया गया था। अफसरों के वहां से निकलते ही टेंट और कुर्सियां तो हटा ली गई, मगर पानी से खाली हुई प्लास्टिक की बोतलें और डिस्पोजल खेत में ही छोड़ दिए गए। डिस्पोजल जिन बॉक्स में आए थे, वह भी अगले दिन तक खेत में बिखरे मिले। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और शहर से पढ़े लिखे लोग, जनप्रतिनिधि आए तो नदी को साफ करने के लिए थे, मगर गंदगी फैला कर चले गए हैं। इसके बाद टीम बाबा लाल दास के बाड़े पर बने घाट पर पहुंची, जहां शनिवार को बड़ा सा पंडाल सजाया गया था, जिसमें अधिकारी और गणमान्य पहुंचे थे। यहां हालात और भी खराब थे। शनिवार को जहां टेंट के नीचे मैट और कुर्सियां बिछी थीं, बड़ा सा मंच बना था। रविवार को वहां प्लास्टिक के डिस्पोजल पूरे खेत में बिखरे पड़े थे, जो एकदम से नदी के तट पर है। यानी हल्की सी हवा भी डिस्पोजल को उड़ाकर नदी में ले जा सकती है। घाट पर मिले स्थानीय निवासी राकेश शर्मा और विनोद ने बताया कि शनिवार को टेंट हटाने के बाद सारा कचरा यहीं छोड़ दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक की खाली बोतलें भी छोड़ी गई थी, जिन्हें बच्चे उठाकर ले गए हैं।
रविवार को फिर लावारिस दिखी नदी
नदी को बचाने के लिए शनिवार को बेशक इसके उद्गम स्थल और घाट पर मेला था। सैकड़ों की संख्या में सफाई कर्मी बुलाए गए थे। तमाम अधिकारी, समाज सेवी, पर्यावरणविद और अन्य नदी को साफ करने के लिए अपने विचार रख रहे थे। नदी को पूरी तरह साफ करने के लिए अभियान को नियमित रूप से चलाने की बात कह रहे थे। मगर रविवार को नदी फिर से लावारिस नजर आई। बाबा लाल दास के बाड़े पर बने घाट के आसपास बसे लोगों ने बताया कि शनिवार को जब तक अधिकारी घाट पर रहे, तभी तक जेसीबी से नदी को साफ किया गया। मगर अधिकारियों के जाते ही जेसीबी वापस चली गईं और तमाम सफाई कर्मी भी अपने फावड़े और तसले लेकर निकल लिए। यही हालात शकलापुरी के भी रहे। यहां भी अधिकारियों के चले जाने के बाद उद्गम स्थल लोगों से पूरी तरह खाली हो गया। लोगों की मानें तो शनिवार को जिसे महाअभियान बताया गया। वह मुश्किल से डेढ़ से दो ही घंटे चला। जितने सफाईकर्मी बुलाए गए थे, उनमें से भी मुश्किल से पांच फीसदी ही नदी में सफाई के लिए उतर सके।
पांवधोई की सफाई के लिए प्रतिदिन अभियान चलाना अभी संभव नहीं है। हम प्रत्येक शनिवार को सफाईकर्मियों को लगाकर थोड़ा-थोड़ा सफाई कराएंगे। रही बात उद्गम स्थल और घाट पर गंदगी फैलने की तो इसकी मुझे जानकारी नहीं है। सफाई कर्मियों को मौके पर भेजकर सफाई कराई जाएगी।
- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।