ओम है परमात्मा का सर्वोत्तम नाम
गंगोह। गांव कुतुबखेड़ी स्थित वैदिक आश्रम के दो दिवसीय 28वें वार्षिकोत्सव के प्रथम दिन आचार्य बिजेंद्र ने कहा कि परमात्मा का सर्वोत्तम नाम ओम है। इसलिए समस्त मनुष्यों को ओम नाम का स्मरण करना चाहिए।
वार्षिकोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में झरौली गुरुकुल महाविद्यालय के अधिष्ठाता आचार्य बिजेंद्र ने अपने प्रवचन में कहा कि परमात्मा कण-कण में समाया है। वह बुद्धि पूर्वक ही सृष्टि की रचना, पालन और संहार करता है। ब्रह्मांड की लगभग सभी तीन हजार भाषाओं में उसका ओम नाम विद्यमान है। कहा कि ओम का उच्चारण गूंगा व्यक्ति भी कर सकता है। केंद्रीय आर्य शक्ति सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं आर्य प्रचारक डा. वीर सिंह भावुक ने कहा कि चैत्र को प्रारंभ होने वाला नववर्ष ही भारतीयों का है जबकि जनवरी से प्रारंभ होने वाला नववर्ष पाश्चात्य अंग्रेजी संस्कृति की देन है। कहा कि अपने नववर्ष को मनाने से हिंदू और भारतीय होने का गर्व महसूस होगा। कहा कि हिंदू जगेगा तभी विश्व जगेगा। प्रख्यात भजनोपदेशक पंडित मदनपाल आर्य ने भजन के माध्यम से श्रोताओं को जागरूक किया। संजय आर्य एवं अंशुल आर्य ने भी प्रभावी ढंग से ईश भजनों की प्रस्तुति दी। संचालन डा. प्रीतमसिंह आर्य ने किया। जिला आर्य प्रतिनिधि सभा प्रधान देवेंद्र आर्य, पृथ्वी सिंह आर्य, छज्जूसिंह, डा. बिजेंद्र आर्य, ऋषिपाल आर्य, सुदेश प्रभा, अनिता आर्या, रेखा आर्या आदि रहे।