बीमारी बढ़ने या जिंदगी खतरे में पड़ने पर रोजा तोड़ने की इजाजत
देवबंद (सहारनपुर)। मुकद्दस रमजान माह में किन सूरतों में रोजा तोड़ देना जायज है?। दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर कहते हैं कि अगर किसी शख्स की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है तो ऐसी सूरत में रोजा तोडना जायज है।
शुक्रवार को मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने फतवा आलमगीरी और अहसानुल फतवा का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई शख्स रोजा रखने के बाद अचानक इतना सख्त बीमार हुआ कि अगर रोजा न तोड़ा तो बीमारी बढ़ जाएगी या जिंदगी खतरे में पड़ जाएगी। मसलन किसी को शुगर है रोजा रखने के बाद अचानक शुगर में इजाफा हो गया या अचानक पेट में तेज दर्द उठा और नाकाबिले बर्दाश्त हो गया या कोई ऐसी बीमारी हो गई जिसका तुरंत इलाज करना जरूरी है वरना मर्ज बढ़ जाएगा और जान के लाले पड़ जाएंगे। ऐसी सूरत में रोजा तोड़ना जायज है। इसके साथ ही मौलाना नसीम अख्तर शाह ने यह भी कहा कि अगर रोजा रखने के बाद किसी को जबरदस्ती रोजा तोड़ने पर मजबूर किया गया और उसे ये यकीन है कि अगर उसने रोजा नहीं तोड़ा तो धमकी देने वाले उसे जान से मार सकते हैं। उसके शरीर का कोई अंग काट सकते हैं या बहुत मारपीट कर सकते हैं तो ऐसी सूरत में रोजा तोड़ने की इजाजत है।