सहारनपुर। आत्मानुभवी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रेम, दया, सहनशीलता और परोपकार की भावना पैदा करती है, जिससे मानवता के सद्गुणों का विस्तार होता है। इसलिए भारतीय संस्कृति सुखदायक है।
गलीरा रोड स्थित ज्योति विहार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा को रविवार को विश्राम दिया और विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। कथा व्यास आत्मानुभवी महाराज ने कहा कि आत्म चिंतन एवं आत्म विश्वास की पराकाष्ठा को पाकर असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। इसलिए मानव जीवन को आत्मज्ञान एवं मानव सेवा द्वारा सार्थक करना मनुष्य की बड़ी बुद्धिमानी है। ईश्वर ने मनुष्य को देह देकर बड़ा उपकार किया है। ईश्वर के उपकारों को कभी भूलना नहीं चाहिए। आधुनिक जगत की दैनिक दिनचर्या के दबाव और तनाव से भरी जिंदगी में सुख-शांति पाने के लिए जरूरी है कि हमारा दृष्टिकोण सकारात्मक हो। तभी मानव का सर्वांगीण विकास होता है। रामनाम के सहारे ही मनुष्य अपना लोक परलोक संवार लेता है। इस दौरान राजेश धीमान, मनमोहन, मदन सिंह, ज्ञानचंद, योगेश, जोगेंद्र, हयात, संजय गुप्ता, आभा गुप्ता, कविता, ममता, इंद्र मौजूद रहे।