सहारनपुर। जैन मुनि विरंजन सागर महाराज ने कहा कि दान और पूजा श्रावक के दो महत्वपूर्ण कर्तव्य हैं। पूजा में मन लगाकर श्रावक प्रभु के द्वार तक पहुंच जाता है।
जैनबाग स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में जैन मुनि के सानिध्य में संगीतमय भगवान महावीर विधान भक्तिभाव से संपन्न हुआ। विरंजन सागर महाराज ने कहा कि पूजा में थोड़ा भोलापन और पागलपन होना चाहिए। जैसे शबरी भक्ति में लीन हो गई और श्रीराम उनके द्वार पर आ गए। समंतभद्र आचार्य जब भक्ति में लीन हुए तो जेल के 48 ताले टूट गए। ऐसी भक्ति करें कि प्रभु प्रसन्न हो जाए। जिस प्रकार हम वृक्ष के पास जाते हैं तो शीतलता अपने आप मिलती है। वैसे ही प्रभु के पास जाकर शीतलता मिलती है और पाप खत्म हो जाते हैं। संजीव जैन, अवनीश जैन, अरुण कुमार जैन, राजकुमार जैन, विपिन जैन, राकेश जैन, मनोज जैन, प्रवीन जैन, अमन जैन, आशीष कुमार जैन, रेणू जैन, शशि जैन, सरिता जैन, अंजलि जैन, प्रीति जैन, मंजू जैन, अनिता जैन, वीना जैन आदि मौजूद रहे।