सहारनपुर। तेज रफ्तार बिना हेलमेट के और उस पर भी तीन सवार तो फिर जान का खतरा तो बढ़ ही जाता है। शहर में यातायात के नियमों का पालन करने की बजाय उसे तोड़ने में अधिक शान समझ रहे हैं। ऐसे युवा ही अपनी मौत को दावत दे रहे हैं। लापरवाही में हेलमेट न पहनने की असावधानी भारी पड़ रही है।
बृहस्पतिवार की रात को बड़गांव क्षेत्र में हुए हादसे में जिस व्यक्ति की मौत हुई उसने हेलमेट नहीं पहना हुआ था। तेज रफ्तार बाइक से जा रहा था। रफ्तार कम होती तो मोटरसाइकिल नियंत्रण में रहती और हेलमेट रहता तो जान भी बच जाती। सिर्फ यही घटना नहीं रोजाना ही इस प्रकार की लापरवाही दुर्घटनाओं में मौत का सबब बन रही है।
सहारनपुर की शहरी भीड़भाड़ वाली सड़कों पर तेज धमाके की आवाज करते हुए पूरी रफ्तार से मोटरसाइकिल चलाने वाले युवाओं को अपनी जान की कतई परवाह नहीं है। एक दो नहीं बल्कि इस रफ्तार पर भी तीन-तीन सवारियां बैठाकर फर्राटे भर रहे हैं। गड्ढा या फिर कोई एक ब्रेकर आया तो संतुलन बनना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पीछे बैठी सवारी का गिरना निश्चित है। पेपर मिल रोड पर जनवरी में हुए हादसे में तीन सवारियां लेकर एक युवक रात में तेज गति से जा रहा था। सामने से आए ट्रक की लाइट पड़ते ही संतुलन बिगड़ गया और ट्रक से जा टकराया। जिसमेें दो लोगों की मौत हो गई। मोटरसाइकिल कंपनियां भी अधिकतम दो लोगों के लिए ही सलाह देती है। लेकिन नियमों को तो लोगों ने धुआं बनाकर उड़ा दिया है। पुलिस अधिकारी भी इसे गंभीरता से लागू करा पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं और हादसे दर हादसे होते जा रहे हैं। एसपी ट्रैफिक विनीत भटनागर का कहना है कि लोगों को जागरूक करने के लिए हर थाना क्षेत्र से अभियान चलाया जा रहा है, चालान की कार्रवाई भी की जा रही है, लेकिन अपनी जान से अधिक युवकों को नियमों को तोड़ना अच्छा लग रहा है। जागरूक करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है कि लोग हेलमेट पहने को अपनी जान की सुरक्षा समझें।
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--। दुर्घटनाएं
दिसंबर में जिले भर में कुल 189 दुर्घटनाएं हुईं। जिनमें 202 लोगों की मौतें हुईं। इनमें 180 पुरुष रहे जिनमें अधिकांश युवा ही शामिल रहे। जबकि 22 महिलाएं शामिल रही। घायलों की संख्या 255 रही।