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कुरान सुनाने पर उजरत लेना और देना हराम

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सहारनपुर। रोजेदारों के सवालों के जवाब व उनकी शंकाओं को दूर करने के लिए बनाई गई हेल्पलाइन पर जमियत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम ए दीन क़ारी इसहाक़ गोरा ने सोमवार को भी काफ़ी रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए।
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हारून सिद्दीकी ने नूरबस्ती से पूछा कि इस साल सदक़ा ए फ़ितर की क्या कीमत निकली है, इसकी कीमत निकालने के शरीयत में किया उसूल हैं?
जवाब - हजरत मोहम्मद सल्लाहु के जमाने में गेहूं वगैरह नाप कर फरोख्त किया करते थे। उस समय तौलने के बजाए नापने का रिवाज था और उस जमाने में नापने का जो एक पैमाना था उसी के हिसाब से सदका ए फितर की मिकदार शरीयत में बताई गई है। 1 किलो 661 ग्राम कुछ माशा गेहूं या गनदुम, जिसकी कीमत आज समय के हिसाब से 30 रुपये निकाली गई है।
प्रश्न- अमंशा सिद्दीकी ने मालूम किया कि उनकी माता जी हैं जिनकी उम्र 52 वर्ष है। 6 माह से काफी बीमार हैं। उन्हें डॉक्टर ने रोजा रखने को सख्ती से मना किया है, परंतु वह जबरदस्ती रोजा रखती हैं, और रखते ही उनकी हालत बिगड़ जाती है। ऐसी सूरत में उनको कैसे समझाया जाए?
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जवाब- यदि कोई व्यक्ति ज्यादा बीमार है और वह जबरदस्ती रोजा रखता है, ऐसा करना गलत है। बल्कि शरीयत उसको सहूलत की इजाजत देती है कि वह रोजा ना रखे, ठीक होने के बाद रोजे की कजा अदा करे।
प्रश्न-डॉक्टर अरशद ने चिलकना से मालूम किया कि मेरे पड़ोस की मस्जिद तीन मंजिला है, जिसमें दो जगह अलग-अलग कुरान ए पाक सुने और सुनाए जा रहे हैं, अक्सर लोगों को आपत्ति है कि ये गलत है, शरीयत की रोशनी में लोग आपसे पूछना चाहते हैं किया गलत है या नहीं?
जवाब- एक मस्जिद में दो हाफिज अलग-अलग नमाज ए तारावीह पढ़ा सकते हैं, परन्तु शर्त ये है कि एक दूसरे की आवाज ना टकराए, बेहतर तरीका ये ही है कि तमाम लोग एक ही हाफिज के पीछे नमाज ए तरावीह अदा करें।
प्रश्न- हसीन अहमद ने देवबंद से जानना चाहा कि वह एक नौकरी पेशा व्यक्ति हैं उनकी महीना आमदनी तकरीबन 60 हजार है। परन्तु साल भर तक उनके पास निसाब की मिकदार जमा नहीं होती, क्या ऐसी सूरत में भी उन पर जकात फर्ज होती है?
जवाब मिला- जी नहीं! जिस व्यक्ति की आमदनी माकूल है, परन्तु साल भर तक उसके पास निसाब की मिकदार जमा नहीं रहती तो उस पर जकात वाजिब नहीं है।
प्रश्न-मोहल्ला शाहमादार से अनीस अंसारी ने मालूम किया कि अगर कोई व्यक्ति तरावीह में कुरान ए पाक सुनाने पर पैसों की मांग करता है और लेता है, आप शरीयत के हवाले से बताएं कि ऐसे व्यक्ति के पीछे कुरान ए पाक सुनना कैसा है?
जवाब - हाफिज ए कुरान मिले या ना मिले, यदि कोई व्यक्ति कुरान पाक सुनाने पर उजरत या पैसे मांगता है, तो ऐसे हाफिज के बजाए छोटी सूरतों से नमाज ए तरावीह अदा कर लेना बेहतर है। पैसा दे कर कुरान न सुनें, क्योंकि कुरान सुनाने पर उजरत लेना और देना दोनो हराम है।
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