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52 फीसदी बच्चों ने छह माह तक केवल मां का दूध पिया

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सहारनपुर। जिले में ऐसे बच्चों की संख्या 52 फीसदी है, जो पैदा होने के छह माह बाद तक केवल मां के दूध पर निर्भर रहे और आज पूरी तरह स्वस्थ हैं। चिकित्सा विभाग के पास मौजूद आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। आज विश्व स्तनपान दिवस है। ऐसे में मां के दूध के फायदों के बारे में उन महिलाओं को पता होना जरूरी है जो मां बनने वाली हैं या भविष्य में मां बनेंगी। चिकित्सकों की मानें तो बच्चे के लिए मां का दूध संजीवनी होता है, जो ना केवल बच्चे का पेट भरता है, बल्कि बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। जिसके बाद बच्चे गंभीर बीमारियों से लड़ पाते हैं। एक तरह से मां का दूध बच्चे केे वह सब चीजें प्रदान करता है जो उसको स्वस्थ रहने के लिए चाहिए। स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) शिशु को जन्म के पहले छह महीने तक केवल अनन्य स्तनपान (एक्सक्लूसिव ब्रेस्ट फीडिंग) कराने की सलाह देते हैं।
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52 प्रतिशत बच्चों ने पिया सिर्फ मां का दूध
यूनीसेफ के डिविजनल मॉनिटर डॉ. मोहन शर्मा ने बताया कि वर्ष 2019 में सहारनपुर में 52 फीसदी बच्चों को एक्सक्लूसिव ब्रेस्ट फीडिंग कराई गई। इसके अलावा पैदा होते ही दूध पीने वाले बच्चों का प्रतिशत 43 रहा है।
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मां के दूध के लाभ
- बच्चे के शरीर के तापमान को सामान्य रखता है।
- बच्चे को इंफेक्शन से लड़ने में मदद करता है।
- बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- समय-पूर्व जन्मे शिशुओं और कम वजन के शिशुओं के लिए मां का दूध लाभकारी है।
- मां का दूध बच्चे के मस्तिष्क का विकास करता है।
- लाभकारी (प्रोबायोटिक) बैक्टीरिया मिलते हैं, जो शिशु के पाचन तंत्र में किसी भी प्रकार की सूजन, दर्द या जलन (इनफ्लेमेशन) दूर कर सकते हैं।
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