सहारनपुर। आईटीसी के मल्टीपर्पज हॉल में बुधवार को हुई नगर निगम की बोर्ड बैठक में पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। पार्षदों की शिकायत थी कि नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी उनकी बात सुनते नहीं हैं। महापौर ने भी इस बात को स्वीकारते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को सुधार लाने की हिदायत दी। नगरायुक्त ने अधिकारियों और कर्मचारियों को जनप्रतिनिधियों की शिकायत को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए।
पार्षद शाहिद ने महापौर से यह तक कह दिया कि यदि नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी आपकी बात नहीं सुनते हैं तो हमें इजाजत दें, हम अपने तरीके से सुधारना जानते हैं। पुनीत चौहान ने सफाईकर्मियों पर दुकानदारों के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बोर्ड के गठन को 13 महीने हो चुके हैं, उन्होंने जो भी शिकायतें की हैं उन पर कार्रवाई नहीं हुई। टिंकू अरोड़ा ने कचरा उठान के लिए रेहड़ों की कमी होने की बात कही।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी गीताराम ने बताया कि प्रत्येक वार्ड में दो-दो नए रेहड़े भेजे गए हैं। इसपर तमाम पार्षद खड़े होकर हंगामा करने लगे। उनका कहना था कि एक-एक ही रेहड़ा पहुंचा है। फिर बाकी रेहड़े कहां गए। चंद्रजीत सिंह निक्कू ने सड़कों किनारे खड़े होने वाले वाहनों के चाला काटे जाने पर रोष व्यक्त किया। उनका कहना था कि पहले नगर निगम शहरवासियों को पार्किंग की व्यवस्था करके दें। उन्होंने नगर निगम की जमीनों पर भी जवाब मांगा। आरोप लगाया कि नगर निगम अपनी जमीनों को कब्जामुक्त कराने में लापरवाही बरत रहा है। करोड़ों रुपये की जमीनों पर कब्जे हो चुके हैं। पार्षद मंसूर बदर ने कहा कि वह पहली बैठक से नगर में विचरण करने वाले आवारा पशुओं खासकर स्वाइन फ्लू के वाहक पशुओं और कुत्तों पर नियंत्रण की मांग करते आ रहे हैं। वर्तमान में स्वाइन फ्लू फैल रहा है, जिसके बाद भी स्वाइन फ्लू के वाहक जानवर खुले में घूम रहे हैं। नगर निगम को इस दिशा में काम करना चाहिए। पार्षद अशोक राजपूत ने नगर के सात जोन में बिना टेंडर के विज्ञापन बोर्ड लगाने का मामला उठाया। अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच कराने की मांग महापौर से की। भरत ने आवास विकास क्षेत्र में अलाव के लिए लकड़ी नहीं डाले जाने की शिकायत की। अन्य पार्षदों ने भी सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए विरोध दर्ज कराया और हंगामा किया।
पार्षद की कुर्सी पर बैठा विधायक प्रतिनिधि, हुई बहस
बोर्ड बैठक में पार्षदों की चेयर पर अन्य किसी व्यक्ति को बैठने की इजाजत नहीं है। मगर अशोक गुप्ता नाम का व्यक्ति खुद को नगर विधायक का प्रतिनिधि बताते हुए पार्षद की कुर्सी पर जाकर बैठ गया। महापौर ने उनसे बैठक में शामिल होने की वजह पूछी तो उनका कहना था कि बैठक में विधायक शामिल हो सकता है और मैं विधायक का प्रतिनिधि हूं। महापौर ने कहा कि प्रतिनिधियों के लिए ऊपर बालकनी में जगह रखी गई है। मगर अशोक गुप्ता कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे। इसे लेकर दोनों के बीच काफी बहस हुई।
कार्यकारिणी समिति सदस्यों का सर्वसम्मति से चयन
- सर्व सम्मति से ही पुराने छह सदस्यों ने समिति के सदस्य पद से इस्तीफा दिया
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। बुधवार को हुई नगर निगम की बोर्ड बैठक में कार्यकारिणी समिति के छह सदस्यों का निर्वाचन होना था, मगर सर्वसम्मति से नए सदस्यों को चयन किया गया। इसके अलावा समिति में पहले से शामिल 12 सदस्यों में से छह ने भी सर्वसम्मति से इस्तीफा देते हुए अपने पद छोड़ दिए।
कार्यकारिणी समिति में कुल 12 सदस्य हैं। नियमानुसार आधे यानी छह सदस्य प्रत्येक वर्ष सेवानिवृत्त किए जाते हैं। नियमानुसार सभी 12 सदस्यों के नाम की पर्ची डालकर आधी पर्चियां उठाई जाती हैं। जिनके नाम की पर्ची उठती है उनको सेवानिवृत्त किया जाता है। मगर यहां ऐसी जरूरत नहीं पड़ी। महापौर ने सदस्यों के साथ बैठक कर छह सदस्यों को राजी कर लिया। जिसके बाद सरिता, मोनिका, भूरा, शावेज, मंसूद बदर, मोहर सिंह ने इस्तीफा सौंप दिया। उनकी जगह नए सदस्यों को लाने के लिए निर्वाचन होना था, मगर सर्वसम्मति से छह लोगों के नाम का चयन किया गया। हालांकि बैठक के बीच में पार्षद पिंकी गुप्ता ने उन्हें सदस्य बनाने की इच्छा जताई। उन्होंने नामांकन करने की बात कही, मगर महापौर से उन्हें समझाया, जिसके बाद वह मान गईं।
समिति के नए सदस्य
कार्यकारिणी समिति में जिन नए पार्षदों को स्थान मिला है। उनमें चौधरी शहजाद, टिंकू अरोड़ा, चंद्रजीत सिंह निक्कू, मान सिंह, अंजना शर्मा और अशोक राजपूत शामिल हैं। कुल 12 सदस्यों में छह सदस्य पुराने रहेंगे, जिनमें संजय गर्ग, यशपाल पुंडीर, रमेश छाबड़ा, फजलुर्रहमान, सिद्घार्थ सैनी, आशुतोष सहगल शामिल हैं।
बोर्ड बैठक में कार्यकारिणी समिति के पुराने सदस्यों में से छह ने इस्तीफा दिया, जिनके स्थान पर नए सदस्यों का चयन भी सर्वसम्मति से कर लिया गया है। ज्यादातर पार्षदों की शिकायत रही कि उनकी सुनवाई नहीं होती है। इस संबंध में अधिकारियों और कर्मचारियों को जनप्रतिनिधियों की बात को प्राथमिकता से लेने को कहा गया है। -- संजीव वालिया, महापौर