प्रस्तावों में उलझा रेलवे विभाग, आखिर विकास कब होगा
सहारनपुर। ए श्रेणी का रेलवे स्टेशन होने के बावजूद सहारनपुर का रेलवे स्टेशन विकास के मामले में अन्य प्रमुख स्टेशनों से पिछड़ रहा है। स्टेशन पर विकास कार्यों के लिए बार-बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन उन्हें ठंडे बस्ते में ही डाला जा रहा है। जिससे सहारनपुर के यात्री आधुनिक सुविधाओं से वंचित हैं। रेलवे अधिकारी बार-बार प्रस्ताव भेज रहे हैं, लेकिन पैरवी न होने के कारण प्रस्तावों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
सहारनपुर रेलवे स्टेशन ए श्रेणी का रेलवे स्टेशन है, लेकिन यहां पर ए श्रेणी के स्टेशन जैसी सुविधाएं आज तक नहीं हो सकी हैं। सिर्फ वाई-फाई लगवाए जाने के अलावा यहां दशकों से कोई नया निर्माण कार्य नहीं हो सका है। सिर्फ मरम्मत का ही कार्य अभी तक हुआ, जबकि प्रस्ताव काफी बड़े-बड़े भेजे जा चुके हैं।
रेलवे के निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार सहारनपुर में चार प्लेटफार्म सात, आठ, नौ और दस के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया था। यह प्रस्ताव लगातार भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि एक साल में प्रस्ताव पर कार्रवाई न होने पर दूसरे वर्ष भेजा जाता है। इस बार फिर से इस प्रस्ताव को भेजा जा रहा है। पैरवी हुई तो ही इसकी फाइल आगे बढ़ सकेगी।
इसके अलावा रेलवे स्टेशन की चारदीवारी के निर्माण का प्रस्ताव, रेलवे स्टेशन के खलासी लाइन से रेलवे रोड की ओर जाने के लिए नए पुल के निर्माण का प्रस्ताव, स्वचालित सीढ़ियों के निर्माण का प्रस्ताव, खलासी लाइन की ओर रेलवे स्टेशन के दूसरे द्वार का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा प्लेटफार्म संख्या चार से पांच को जोड़ने वाले पुल को खलासी लाइन तक बढ़ाए जाने का कार्य भी किया जाना था। इनमें से प्लेटफार्म संख्या चार से पांच को जोड़ने वाले पुल को खलासी लाइन तक बढ़ाए जाने का कार्य शुरू कर दिया गया था तथा रेलवे स्टेशन के दूसरे गेट का निर्माण भी शुरू होना था। हालांकि पुल का निर्माण शुरू होने के बाद रुक गया है।
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-- स्टेशन से पहले ही उतरना पड़ता है यात्रियों को
आवास विकास निवासी सतीश कहते हैं कि प्लेटफार्म खाली न होने से ट्रेनों को आउटर पर आधा-आधा घंटे तक के लिए रोक दिया जाता है। जिस कारण यात्रियों को आउटर पर ही उतरना पड़ रहा है। इससे काफी परेशानी हो रही है। प्लेटफार्मों का निर्माण कराया जाना जरूरी है।
माधवपुरम निवासी राकेश कहते हैं कि दिल्ली की ओर से सुबह आने के लिए सहारनपुर तक कोई ट्रेन नहं है। एक ट्रेन आतीं हैं वे टपरी से ही मुड़ जाती है। कई बार उसे सहारनपुर तक करने की मांग उठ चुकी है। लेकिन अधिकारी प्लेटफार्म कम होने की बात कह रहे हैं।
खलासी लाइन निवासी रामेश्वर प्रसाद कहते हैं कि मेरठ और दूसरे स्टेशनों पर लिफ्ट लग गई है। लेकिन यहां बुजुर्गों के लिए लिफ्ट ही नहीं लग पाई है। बुजुर्गों को ऊंची सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ रहा है।
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- पहले भेजा गया था प्रस्ताव, अब फिर से भेजा जा रहा है
रेलवे स्टेशन अधीक्षक कपिल शर्मा का कहना है कि रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्मों की कमी है। जिस कारण ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ रहा है। कुछ वर्ष पूर्व सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर सात, आठ, नौ और दस के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। निर्माण विभाग की ओर से फिर प्रस्ताव भेजा जा रहा है। प्लेटफार्मों का निर्माण होने से काफी राहत मिलेगी। एस्केलेटर का सामान भी है, जिसका निर्माण किया जाना है।
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- अगले साल तक बदल जाएगी स्टेशन की सूरत
सांसद राघव लखनपाल शर्मा का कहना है कि अगले वर्ष तक सहारनपुर रेलवे स्टेशन की सूरत ही बदल जाएगी। महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट रेलवे लाइन दोहरीकरण का कार्य पूरा होने जा रहा है। फ्रेट कोरिडोर का कार्य तेजी से चल रहा है। सभी प्लेटफार्मों में सुधार किया जा रहा है। स्टेशन का दूसरा गेट तैयार हो रहा है। एक पुल निर्माणाधीन है। एस्केलेटर का कार्य होना है। इतने कार्य के बाद सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर काफी सुविधाएं हो जाएंगी। नए प्लेटफार्मों के निर्माण को लेकर भी उनका प्रयास चल रहा है। डीआरएम का सहारनपुर दौरा भी होना है। वह लगातार रेलवे स्टेशन के विकास का प्रयास कर रहे हैं।