देवबंद (सहारनपुर)। देश में शरीया कोर्ट खोला जाना राष्ट्रद्रोह है। उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के इस बयान पर देवबंदी उलमा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर यह राष्ट्रद्रोह है तो वसीम रिजवी जिस तरह मुल्क में नफरत फैलाने वाले बयान देते हैं तो क्या यह उनकी देशभक्ति है।
मदरसा जामिया तुल कुरआन के मोहतमिम मौलाना खलीलुर्रहमान ने कहा कि देश में दारुलकजा खुलने से अदालतों में पारिवारिक मामलों का बोझ कम होगा और इनके स्थापित होने से न तो भारतीय संविधान की अवमानना होगी और न ही उस पर कोई फर्क पड़ेगा। क्योंकि दारुलकजा के अपने शरीया कानून होते हैं। जिसमें बैठने वाले काजी शरीयत की रोशनी में मसले के हल तलाशते हैं। इसमें राष्ट्रद्रोह जैसी कोई भी चीज नहीं है। उन्होंने कहा कि वसीम रिजवी अपना दिमागी संतुलन खो चुके हैं जो वह शरीया कोर्ट को राष्ट्रद्रोह बता रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह राष्ट्रद्रोह है तो वसीम रिजवी जिस तरह अपने बयानों से मुल्क में नफरत का जहर घोलकर लोगों के बीच दूरियां पैदा कर रहे हैं क्या उन्हें देशभक्त कहा जाएगा। असल में खुद वसीम रिजवी राष्ट्रविरोधी हैं जिनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। मौलाना खलीलुर्रहमान ने कहा कि शरई अदालतें खुलने से मुस्लिम महिलाओं को पारिवारिक विवादों को सुलझाने में आसानी होगी।
दारुल उलूम वक्फ की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य के इंतकाल पर दुख जताया
देवबंद। दारुल उलूम वक्फ की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना मुफ्ती अब्दुल्लाह इस्माइल पटेल के इंतकाल पर गहरा दुख जताया है। दारुल उलूम वक्फ में उनके लिए दुआएं मगफिरत भी की गई।
गुजरात के रहने वाले मौलाना मुफ्ती अब्दुल्ला इस्माइल दारुल उलूम वक्फ की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य होने के साथ साथ प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन थे। जो इस्लामिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम कर रहे थे। मंगलवार को उनके इंतकाल की खबर पहुंची तो इस्लामिक हल्कों में शोक की लहर दौड़ गई। दारुल उलूम वक्फ में शोकसभा हुई। जिसमें उनके लिए दुआएं मगफिरत की गई। संस्था के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी ने कहा कि मुफ्ती अब्दुल्ला का दुनिया से रुखसत होना इस्लामिक जगत के लिए बड़ा नुकसान है। उनके मार्गदर्शन में संस्था ने बहुत कम समय में अधिक तरक्की की। उनकी कमी को पूरा नहीं किया जा सकता। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक संभली, मौलाना शकेब कासमी, मौलाना इस्लाम कासमी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, कारी बिलाल अहमद, मुफ्ती अहसान, मौलाना सिकंदर, कारी अलाउद्दीन, मौलाना जैनुद्दीन कासमी आदि ने दुख जताया है।