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स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में संस्था जहान-ए-अदब एकेदमी ने कराया मुशायरा

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... मंदिर में होता है शंखनाद मस्जिद में अजान की वाणी है
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देवबंद (सहारनपुर)। जहान-ए-अदब एकेडमी के तत्वावधान में जश्न-ए-आजादी के उपलक्ष्य में महफिल मुशायरा आयोजित किया गया। जिसमें शायरों ने देशभक्ति से संबंधित कलाम प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
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मोहल्ला बैरुन कोटला स्थित ऊर्द घर में कार्यक्रम का उद्घाटन रालोद नगराध्यक्ष सलीम ख्वाजा ने फीता काटकर एवं मुमताज अहमद ने शमा रोशन कर किया। शमीम किरतपुरी ने पढ़ा दोस्ताने की बात करते हो, किस जमाने की बात करते हो। तनवीर अजमल की पंक्ति यूं रही कहां पीछे हटे हैं हम इसे आबाद करने में, लहू शामिल हमारा है वतन आजाद करने में। दिलशाद खुश्तर ने पढ़ा सरों के फूल बिखराये थे हमने, हमें तब जाकर आजादी मिली है। डा. शमीम देवबंदी ने कहा इस देश की शान का हम सबके अरमान का, बुलंद रहा है, बुलंद रहेगा झंडा हिंदोस्तान का। दिल्ली के राशिद बदर ने पढ़ा फिर एक शख्स ने दी जवाल को दावत, उरूज जब से मिला है सलाम भूल गया। जावेद आसी ने कहा मेरी किस्मत है हिंदुस्तान जैसी, मुझे अपनों ने ही लूटा बहुत। डा. दिवाकर गर्ग ने पढ़ा मेरा भारत सबसे सुंदर उसकी ये अमर कहानी है, मंदिर में होता है शंखनाद मस्जिद में अजान की वाणी है। डा. सादिक देवबंदी ने कहा बेबात सबसे यूं ही उलझने लगा हूं मैं, मुझको तेरी जुदाई ने जिद्दी बना दिया। चांद देवबंदी ने पढ़ा हो कफन तिरंगे का नाम हो शहीदों में, मांगता हूं अक्सर मन्नतों मुरादों में। इनके अलावा सुहेल देवबंदी, अदनान अनवर, सुहेल अकमल, डा. काशिफ अख्तर, मुदस्सिर खान, शाकिब गौड़, नबील उस्मानी, अफजाल गौड़, जशीन अहमद, जुहेर अहमद, नूर देवबंदी, वली वक्कास, फैसल उस्मानी आदि ने खूबसूरत कलाम प्रस्तुत किए। इस मौके पर वजाहत अनवर, माहिर हसन, सलीम उस्मानी, नाहिद अंसारी, आमिर सिद्दीकी, मुफ्ती आमिर, उवैस गौड़, सलमान अहमद आदि मौजूद रहे।
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