देवबंद (सहारनपुर)। श्रीनगर के लाल चौक पर झंडा फहराने का विरोध करने को लेकर हुई मारपीट पर उलमा ने गुस्से का इजहार किया है। उलमा का कहना है कि अफसोस की बात है कि हमारे ही देश में रहकर कुछ लोग तिरंगा फहराने का विरोध कर रहे हैं। तिरंगा मुल्क की आन-बान और शान है। इसलिए सभी लोगों को चाहिए कि वह राष्ट्रीय पर्वों को ईद और दीपावली की तरह मनाएं।
जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन कारी इसहाक गोरा ने कहा कि श्रीनगर लाल चौक पर तिरंगा फहराने का विरोध करने वाले और भटके हुए लोगों को समझना चाहिए कि लाल चौक हिंदुस्तान का एक हिस्सा है, वहां पर तिरंगा फहराना चाहिए। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वो मुल्क के वफादार नहीं हो सकते। बल्कि यूं कहा जाए कि जिस थाली में खा रहे हैं उसी में छेद कर रहे हैं। इस्लाम में इस तरह का अमल करने को हराम करार दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमें अपने मुल्क से वफादारी करनी चाहिए और 26 जनवरी हो या फिर 15 अगस्त इन पर्वों को ईद और दीपावली की तरह मनाना चाहिए। क्योंकि यह दिन हमारे लिए बहुत खुशी का दिन है। कारी इसहाक गोरा ने विरोध करने वालों से कहा कि तिरंगे का विरोध करने के बजाए वह मुल्क से वफादारी दिखाते हुए शान के साथ ध्वजारोहण करें।