सहारनपुर। ढमोला नदी के पानी ने पांच साल पहले मचाई तबाही से अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया। कागजों में अधिकारी तटबंध बनाने और अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्ययोजना ही बनाते रहे। एफआईआर भी दर्ज कराई गईं। स्थान भी हर बार चिह्नित किए गए। कागजों तक ही कार्रवाई सिमट कर रह गई। इस बार फिर से ढमोला उफनी है तोे इसपर खलबली मची हुई है।
सहारनपुर में ढमोला ने वर्ष 2013 में ऐसी तबाही मचाई थी, जिसे याद कर आज भी लोग सिहर जाते हैं। रात में आया पानी लोगों के बेड तक बहाकर ले गया था। कई मवेशी बह गए, कई मकान गिर गए थे। लोग बेघर हो गए। आधा शहर ही डूब गया था।
इस त्रासदी के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को ढमोला पर तटबंध बनाने और ढमोला से अतिक्रमण हटाकर उसे कब्जा मुक्त कराए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी। सिंचाई विभाग ने लोगों को नोटिस दिए, ढमोला की भूमि चिह्नित कर ली गई। लेकिन बरसात गुजर जाने के बाद सिंचाई विभाग ने फाइल को ही बंद कर दिया। उसके बाद तो ढमोला पर और कब्जे होते चले गए। एक तो पूरा स्कूल ही ढमोला में बन गया। कुछ धार्मिक स्थल बना डाले। लोगों के मकान, पशुओं के बाड़े बना दिए। ढमोला नदी का मूल स्वरूप ही बिगड़ता चला गया।
लोगों ने 2016 में एक बार फिर से ढमोला से अतिक्रमण हटवाने के लिए आवाज उठाई। प्रशासनिक अधिकारी फिर सक्रिय हुए। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने घर-घर जाकर नोटिस थमाए। डेढ़ सौ से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। लेकिन ये सब सिर्फ खानापूर्ति तक ही सीमित रही। यह सब प्रक्रिया करने के बाद सिंचाई विभाग ने बहानेबाजी की और फिर फाइल को बंद कर दिया गया।
ढमोला फिर से उफनी, हालांकि पानी इतना नहीं आया, जिससे कोई बड़ा नुकसान हो पाता। लेकिन घरों तक पानी पहुंचने और गलियों के लबालब होने से ही लोग दहशत में आ गए है।
अधिक पानी नहीं आया
अपर जिलाधिकारी प्रशासन एसके दुबे का कहना है कि ढमोला में इतना पानी नहीं आया कि किसी का कोई बड़ा नुकसान हुआ हो। पानी उतर गया है। लोग सुरक्षित अपने घरों में पहुंच गए हैं। विभागीय कार्रवाई के बारे में वे जानकारी कराएंगे।