गंगोह (सहारनपुर)। साहब, मै आपके सामने खड़ा हूं, सांसें ले रहा हूं, आपसे बात कर रहा हूं, बताइये अपने जीवित होने का इससे बड़ा और क्या सबूत दूं। एक वृद्ध किसान ने जब जिलाधिकारी के समक्ष ये बात कही तो वह भी अचंभे में रह गए। पीड़ित किसान ने बताया कि गन्ना कामगार ने उसे मृत दर्शाकर उसकी गन्ना पर्ची बंद कर दी है। वह अपने जिंदा साबित करने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। हालांकि जिलाधिकारी के आश्वासन के बावजूद अभी तक किसान को न्याय नहीं मिल पाया है।
एक किसान को मृत दर्शाकर उसकी मिल को होने वाली गन्ना आपूर्ति बन्द करा दिए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। गांव आलमपुर निवासी किसान पिरथी पुत्र नरसिंह सैनी उत्तम शुगर मिल शेरमऊ का गन्ना दाता किसान है। जिसका गन्ना ढुलाई करके मिलगेट पर तौल होता रहा है। पीड़ित किसान ने बताया कि पूरे गन्ना सत्र के दौरान उसके पास एकमात्र पर्ची ही आई है। इसके बाद उसकी पर्ची आनी बंद हो गई। जब उसने जांच पड़ताल की तो पता चला कि गन्ना कामगार ब्रिजेश की रिपोर्ट के आधार पर उसकी मृत्यु हो जाने के चलते गन्ना आपूर्ति की पर्ची भेजनी बंद कर दी गई है। इसके बाद से पीड़ित किसान स्वयं को जिन्दा साबित करने के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर काटता फिर रहा है। मगर उसकी कही सुनवाई नही हो पा रही है। पीडित ने सहकारी गन्ना समिति सरसावा के सचिव को भी ज्ञापन सौंपकर बताया था कि कि उसका कृषक कोड संख्या 71086 और गन्ना ढुलाई केन्द्र शेरमऊ शुगर गेट है। अभी तक उसके पास केवल एक पर्ची पहुंची है। आगे उसे गन्ना कामगार ने मृत दर्शाकर पर्ची बन्द करा दी है। पीडित ने प्रमाणपत्र प्रस्तुत करते हुए स्वयं को जीवित दर्शाते हुए पर्ची जारी कराने की मांग की। मगर कोई सुनवाई नही हुई। इसके बाद मृत घोषित जीवित किसान ने नकुड़ में 20 मार्च को जिलाधिकारी पीके पांडेय की अध्यक्षता में आहूत समाधान दिवस में भी प्रार्थनापत्र देकर उसे जीवित घोषित करके उसकी गन्ना आपूर्ति पर्ची जारी कराने और गैरजिम्मेदार कामगार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की। जिलाधिकारी ने किसान को अतिशीघ्र उसकी समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। 24 घंटे बीतने के बावजूद ना तो उसकी समस्या का समाधान हुआ और ना ही दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई ही हो पाई है।