400 नए उद्योग लगे, पर दूर नहीं हो सकीं दिक्कतें
सहारनपुर। बजट आने वाला है। पिछले बजट में उद्यमी और कारोबारियों को बढ़ावा देने के लिए कई सहूलियत दी गईं, जिसका प्रभाव एमएसएमई सेक्टर में नई इकाइयां स्थापित होने और विकसित होने में दिखा। मगर फाइलें लटकाकर रखने की बैंक अफसरों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पाया। वहीं, सिंगल विंडो सिस्टम से भी समस्याओं का पूरी तरह समाधान नहीं होना कारोबारी और उद्यमियों को दुश्वारी से घेरे रहा।
कोरोना काल की वजह से यह वर्ष उद्योग जगत के लिए चुनौती भरा रहा। एक वर्ष में करीब 400 नए लघु, सूक्ष्म और कुटीर उद्योग लगे हैं। इससे जनपद में करीब आठ हजार लोगों को रोजगार मिला है। इस वर्ष प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लेकर पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र में फुटवियर की इकाई लगाने वाले युवा उद्यमी आकाश जाटव का कहना है कि उद्योग स्थापित करने में अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। पहले बाहर से आने वाले प्रशिक्षित कारीगरों को बुलाने में दिक्कत आती थी। अब औद्योगिक क्षेत्र में इकाई लगने से कारीगरों को बुलाने में आसानी हो रही है। वहीं, जनता रोड पर बेसन और नमकीन बनाने की इकाई लगाने वाले युवा उद्यमी दिवाकर गुप्ता ने कहा कि यह वर्ष कारोबार के हिसाब से बढ़िया नहीं रहा। उत्पादों को बाहर नहीं भेज सके, कारोबार सिर्फ स्थानीय बाजार पर ही निर्भर रहा।
बैंक स्तर पर आवेदनों के निस्तारण में लापरवाही
उद्यमी और कारोबारियों को सबसे ज्यादा समस्या बैंकों से ऋण स्वीकृत कराने में हुई। बैंक स्तर पर फाइलों के निस्तारण का आलम यह है कि पिछले दिनों जब उच्च अधिकारियों ने समीक्षा की तो, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत उद्योग विभाग द्वारा स्वीकृत 495 आवेदनों में से बैंकों ने सिर्फ 55 ही स्वीकृत किए। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के 140 आवेदनों में से सिर्फ 22 स्वीकृत हुए। एक जिला एक उत्पाद के तहत 115 आवेदनों में से भी सिर्फ 30 को स्वीकृति मिली।
एमएसएमई सेक्टर की इकाइयां ---- 9672
वुड कार्विंग हैंडीक्राफ्ट की इकाइयां -- 3500
हौजरी उद्योग ------------------------ 150
एकल खिड़की व्यवस्था प्रभावी हो
सहारनपुर इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवकुमार गौड़ का कहना है कि नए उद्योगों की स्थापना के लिए प्रोत्साहन नीति के तहत एकल विंडो सिस्टम का प्रावधान हुआ। इसके बावजूद नए उद्यमी को विभिन्न विभागों से स्वीकृति में काफी भागदौड़ करनी पड़ रही है। आगामी बजट में इसका सरलीकरण होना चाहिए।
एमएसएमई को पैैकेज की दरकार
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र मिगलानी का कहना है कि लॉकडाउन के दुष्प्रभाव से उद्योगों को उबारने के लिए बजट में टैक्स में राहत के साथ ही आर्थिक पैकेज की दरकार है। कलस्टर बनने से वुड कार्विंग उद्योग को काफी राहत मिलेगी। कॉमन फैसिलिटी सेंटर के बनने से कारोबार को गति मिलेगी।