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हर महीने 300 शिकायतें, इनमें 10 फीसदी भ्रष्टाचार की

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आईजीआरएस पोर्टल और अन्य माध्यमों से हो रही शिकायतें
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इनमें सरकारी योजनाओं के साथ ही ग्राम पंचायतों, बिजली, राजस्व और पुलिस विभाग की शिकायतें अधिक
भ्रष्टाचार के आरोप में लेखपाल, सिपाही से लेकर अफसरों पर गिर चुकी है गाज
अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक दिवस
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। पुलिस प्रशासन से लेकर अन्य सरकारी विभागों के कामकाज आनलाइन किए गए, ताकि लोगों को दलालों से बचाया जा सके और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे। बावजूद भ्रष्टाचार से जुड़े मामले कम नहीं हो रहे हैं। जन सुनवाई पोर्टल, जिला मुख्यालय, पुलिस मुख्यालय और विकास भवन में ही आनलाइन और मैनुअल हर महीने 300 से अधिक शिकायतें आ रही हैं, जिनमें 10 से 15 फीसदी शिकायतें किसी न किसी तरह के भ्रष्टाचार से जुड़ी आ रही हैं। इनमें सरकारी योजनाओं में गोलमाल के अलावा सबसे अधिक ग्राम पंचायतों, बिजली, राजस्व और पुलिस विभाग से जुड़ी हैं।
सरकारी विभागों में ऐसी शिकायतें सबसे अधिक
- ग्राम पंचायतों में सड़क, नाली और भवन निर्माण में गोलमाल
- प्रधानमंत्री आवास, किसान सम्मान निधि सहित अन्य योजनाओं में पात्रों का चयन न होना
- पुलिस विभाग पर जांच, कार्रवाई और चालान के नाम पर अवैध वसूली के आरोप
- विद्युत चेकिंग और मीटर में गड़बड़ी के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूली
- अवैध रूप से खनन कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाना
- शिक्षा विभाग में नियुक्ति, फर्नीचर और वर्दी के नाम पर गोलमाल
- विधवा, वृद्धावस्था पेंशन में अनियमितताओं की शिकायतें
- छात्रवृत्ति वितरण और राशन वितरण में गोलमाल के मामले
- बैंकों में ऋण वितरण में भ्रष्टाचार की भी शिकायतें आती रही हैं
शिकायत के कई माध्यम, फिर भी अटके समाधान
- शिकायत के लिए आनलाइन पोर्टल के अलावा तहसील दिवस, थाना दिवस, सहायता शिविर के अलावा रोजाना सुनवाई के माध्यम है। बावजूद 80 फीसदी शिकायतें विभागों में ही जांच के लिए इधर-उधर लटकी रहती हैं। कम से कम 15 दिन में समाधान के दावे के बावजूद महीनों तक बार-बार शिकायत होती रही हैं।
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भ्रष्टाचार और घोटालों के प्रमुख मामलों में कार्रवाई
- 21 सितंबर, 2020 : परिषदीय विद्यालयों में फर्नीचर खरीद घोटाले में थाना सदर बाजार पुलिस ने जिला समन्वयक (निर्माण) विजयंत कुमार और फर्नीचर भेजने वाले तुषारकांत शर्मा को धोखाधड़ी सहित अन्य आरोप में गिरफ्तार किया। बाद में जिला समन्वयक को सेवा मुक्त कर दिया गया।
- तीन दिसंबर, 2020 : सहारनपुर सहित अन्य क्षेत्रों के आईटीआई में साढ़े तीन करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में आजाद समाज पार्टी जिलाध्यक्ष अनिल ओजस्वी को उत्तराखंड पुलिस ने गिरफ्तार किया।
- 22 जुलाई, 2020 : राजकीय मेडिकल कालेज में 51 लाख के स्टेशनरी घोटाले में दो लिपिक बर्खास्त, दो के निलंबन की संस्तुति की गई थी। एक रुपये के लिफाफे को 246 रुपये में खरीदा गया था। कमिश्नर ने जांच कराई तो हुई कार्रवाई।
- 12 जून, 2020 : फर्जी शिक्षिका अनामिका शुक्ला प्रकरण में विद्यालय की वार्डन ललिता देवी की संविदा समाप्त की गई। बाद में जिला समन्वयक (बालिका शिक्षा) को आदित्य नारायण को सेवा मुक्त किया गया।
- 20 जून, 2019 : गंगोह क्षेत्र के किसान शिवराज ने विरासत दर्ज कराने के मामले में सात हजार रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में शिकायत की थी। एंटी क्रप्शन टीम ने लेखपाल वीरसेन को गिरफ्तार किया था।
- सात मार्च, 2019 : पशु व्यापारी से 10 हजार रुपये महीना की मांग करने के आरोप में थाना कुतुबशेर में तैनात रहे सिपाही पंकज कुमार को एंटी क्रप्शन टीम ने गिरफ्तार किया था। इससे पहले भी अवैध वसूली की शिकायतों पर पांच सिपाहियों के कार्य स्थल बदले गए थे।
- जुलाई, 2019 : प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार पर डूडा में आउट सोर्स पर कार्य करने वाली एजेंसी मैसर्स स्पेस कंबाइन प्राइवेट लिमिटेड के सिटी मिशन मैनेजर आनंद भारती सहित अन्य लोग हुए गिरफ्तार। एजेंसी के आठ कर्मचारियों को हटाया भी गया। आवेदकों से 1500 से 2500 रुपये तक वसूले जाने के आरोप लगे थे। अपात्रों को आवंटन के मामले भी सामने आए थे।
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- कुछ मामलों में की गई है कार्रवाई : सीडीओ
- मुख्य विकास अधिकारी प्रणय सिंह का कहना है कि सरकारी योजनाओं और ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें ज्यादा होती हैं। इनमें कुछ राजनीतिक और निजी रंजिश के कारणों से भी आती हैं। सत्यापन कराकर कार्रवाई की जाती है। कुछ मामलों में कार्रवाई की भी गई है।
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