सहारनपुर। जिले में 24 घंटे से अधिक की लगातार बूंदाबांदी से न्यूनतम तापमान पांच और अधिकतम तापमान दस डिग्री गिरा। इससे मौसम ठंडा हो गया। कई जगह जलभराव और कीचड़ समस्या का कारण बना। बारिश 15 एमएम दर्ज की गई।
जनपद में बृहस्पतिवार की शाम सात बजे से शुक्रवार की रात तक लगातार बूंदाबांदी रही। इसकी वजह से जनजीवन प्रभावित रहा। मजदूरों और टेंपो व ई-रिक्शा चालकों का काम मंदा रहा। जो न्यूनतम तापमान एक दिन पहले बृहस्पतिवार को 15 डिग्री सेल्सियस था वह गिरकर दस डिग्री सेल्सियस पर आ गया। अधिकतम तापमान बृहस्पतिवार को 23 डिग्री सेल्सियस था, जो दस डिग्री गिरकर 13 डिग्री सेल्सियस रहा। 14 जनवरी के बाद पहली बार अधिकतम तापमान इतने निम्न स्तर पर आया। तापमान में भारी गिरावट का असर मौसम पर नजर आया। ठंडक होने की वजह से अनेक लोग स्वेटर और जैकेट पहने नजर आए।
उधर, लगातार बूंदाबांदी के कारण शहर में अनेक जगहों पर जलभराव और कीचड़ रहा। नेहरू मार्केट में जर्जर हो चुकी स्मार्ट रोड के फुटपाथ पर जलभराव रहा। अंबाला रोड और घंटाघर से कोर्ट रोड पुल के बीच भी स्मार्ट रोड पर जलभराव नजर आया। सिविल लाइन चौकी के पास से कलक्ट्रेट जा रहे मार्ग पर कीचड़ और जलभराव रहा। महानगर और जनपद में अनेक जगह इसी तरह जलभराव और कीचड़ के हालात रहे, जिसकी वजह से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
फसलों और बागवानी के लिए फायदेमंद है बूंदाबांदी
इस समय जनपद में गेहूं और सरसाें की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि गेहूं और सरसों के पौधे में दाना पड़ चुका है। उसके लिए हल्की बूंदाबांदी फायदेमंद है। यदि ऐसे में तेज हवा चले और फसल गिर जाए तो नुकसान की बात है। गन्ने और अन्य फसलों के लिए भी ऐसी बूंदाबांदी अच्छी बताई जा रही है। उधर, आम के बागों में बौर आया हुआ है। उसके लिए भी शांत बारिश नुकसानदायक नहीं है।
कई क्षेत्रों में बाधित रही विद्युत आपूर्ति
महानगर के कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित रही। हकीमपुरा बिजलीघर से जुड़े करीब एक दर्जन गांव और कॉलोनियों में शुक्रवार की शाम सात बजे बिजली चली गई थी, जो रात करीब तीन बजे आई। इसकी वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जनपद में अन्य जगहों पर भी बिजली का घंटों का कट रहा।
बाजार पर भी पड़ा असर
बूंदाबांदी का असर बाजार पर भी पड़ा। ईद और नवरात्र होने के बावजूद बाजारों में कम संख्या में खरीदार पहुंचे, जो दुकानें कई दिन से सड़कों तक सज रही थी। बूंदाबांदी के कारण दुकानें अंदर ही सिमट गई।