रंधेडी में हैपेटाइटिस बी से दो ग्रामीणों की मौत
लखनौती (सहारनपुर)। गांव रंधेडी में एक सप्ताह में हैपेटाइटिस बी से एक महिला समेत दो ग्रामीणों की मौत हो गई। एक सप्ताह में दो मौतें होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
सीएचसी गंगोह के तहत गांव रंधेडी निवासी 50 वर्षीय मेघराज गत दो महीने से हैपेटाइटिस बी से पीड़ित था। परिजनों ने उसका उपचार सहारनपुर कराया, लेकिन सुधार होने के बजाय उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उसे हायर सेंटर चंडीगढ़ भर्ती कराया गया। कुछ दिन इलाज करने के बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो चिकित्सकों ने शुक्रवार को दिल्ली के लिए रेफर कर दिया। रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। उसके दो बेटे है। 17 वर्षीय छोटा बेटा अनुज भी हैपेटाईटिस से पीड़ित है। वहीं, रंधेडी की ही 48 वर्षीय बाला भी पिछले डेढ़ माह से हैपेटाइटिस से जूझ रही थी। परिजनों ने उसका इलाज अंबाला के मुलाना स्थित अस्पताल में करा रहे थे। बृहस्पतिवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इसके अलावा गांव की ही 45 वर्षीय संतोष भी हैपेटाइटिस बी से पीड़ित है। उसका उपचार हरिद्वार के एक अस्पताल में चल रहा है। ग्राम प्रधान प्रदीप, रफल सिंह, मास्टर मैनपाल, जोनी, सिताब, विकास, सुशील आदि ग्रामीणों ने हैपटाइटिस बी के टीके लगवाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बीच में एक तालाब है। जो गंदा पानी से अटा पड़ा है। यही हैपेटाइटिस बी की बढ़ती बीमारी का कारण है।
उधर, सीएचसी प्रभारी डॉ अनवर अंसारी का कहना है कि मृतक दोनों ही मरीजों को किसी बीमारी के चलते 20-22 साल पहले ब्लड चढ़ाया गया था। हैपेटाइटिस का वह मुख्य कारण है। उन्होंने सलाह दी कि यदि किसी मरीज को खून की आवश्यकता पड़े तो सरकारी लैब में टेस्ट कराकर ही खून चढ़वाए। बिना जांच किए खून चढ़ाने से गंभीर बीमारियों के होने का खतरा रहता है।