सहारनपुर में वैसे तो हर नए साल पर लोगों की कुछ नया करने की योजनाएं रहती हैं, लेकिन आगामी वर्ष 2017 कई मायनों में सहारनपुर के लिए एक नहीं अनेक उम्मीदों से भरा है।
वर्षों से लटकी पड़ी सहारनपुर के विकास से जुड़ी अनेक योजनाओं को यदि आगामी वर्ष में अमलीजामा पहनाया जाता है, तो निश्चित रूप से 2017 यहां के लोगों के लिए विकास के लिए नए अवसर खोलेगा।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी योजना में सहारनपुर पहले साल से शामिल है, लेकिन दुर्भाग्यवश सहारनपुर तीन चरणों में अपना चयन कराने में विफल रहा है। अब चौथा चरण 2017 में होना है।
इससे पहले जनवरी में शहर का स्वच्छता सर्वेक्षण होना है। इस बार शहरवासियों को शहर के चयन की पूरी उम्मीद है। नगरायुक्त ओपी वर्मा भी इस बार चयन को लेकर आश्वस्त हैं।
नगर निगम को बने करीब सात साल बीत चुके हैं। नगर निगम बनाने के दौरान शहर में नए 32 गांवों को शामिल किया गया था। यह काम बसपा की सरकार ने किया था।
सहारनपुर को नगर निगम बने भले ही सात साल बीत चुके हों, मगर अभी तक यहां मेयर का चुनाव नहीं हो सका है। सपा का हमेशा से आरोप रहा है कि बसपा ने दलित बाहुल्य गांवों को इसमें शामिल किया है।
अब हाल ही में आठ नए गांवों को इसमें और जोड़े जाने को हरी झंडी मिली है। उम्मीद है कि 2017 में यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे को पास हुए कई साल बीत चुके हैं।
सिक्स लेन बनने की वजह से सड़क का चौड़ीकरण होना था, जिसके लिए सड़क किनारे खड़े लाखों पेड़ काटे गए थे। पेड़ों के काटने को लेकर मामले में अड़ंगा लग गया था। इसकी वजह से दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे के निर्माण का काम लटका आ रहा है।
अब राज्य सरकार ने दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे को बनवाने का जिम्मा लिया है। इसके लिए विज्ञापन भी निकाला जा चुका है। उम्मीद है कि 2017 में इसपर काम भी शुरू हो जाएगा।
बसपा सरकार ने करीब छह साल पहले सहारनपुर को मेडिकल कॉलेज की सौगात दी थी। मगर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने की वजह से कॉलेज चालू नहीं हो सका था।
सपा ने सत्ता में आते ही मेडिकल कॉलेज का नाम बदलते हुए इसमें ओपीडी चालू करा दी थी। इसे चालू हुए पांच साल होने को हैं, मगर अभी तक यहां कक्षाएं शुरू नहीं हो सकी हैं।
ऐसे में यह मेडिकल कॉलेज की बजाय केवल अस्पताल बनकर रह गया है। विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। उम्मीद है कि वर्ष 2017 में बनने वाली नई सरकार मेडिकल कॉलेज में कक्षाएं भी शुरू कराएगी।
सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर आजादी के बाद से कोई खास बदलाव नहीं हुए हैं। स्टेशन के उत्तरी दिशा में मुख्य द्वार है। मगर दक्षिणी क्षेत्र में नया शहर बसे होने की वजह से दक्षिणी क्षेत्र में भी एंट्री बनाने की मांग वर्षों से उठ रही है।
स्टेशन पर प्लेट फार्मों की संख्या सात है, जबकि गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्लेटफार्म कम होने की वजह से लगभग सभी गाड़ियों को आउटर पर रोकना पड़ता है। प्लेटफार्म बढ़ाने की मांग भी उठती रही है। उम्मीद है कि 2017 में इन मांगों पर अमल होगा।
मुजफ्फरनगर-सहारनपुर फोरलेन पर काम चल रहा है। उम्मीद है कि वर्ष 2017 में यह फोरलेन पूर्ण होगा, जिसके बाद इस मार्ग से गुजरने वालों को जाम से तो राहत मिलेगी ही। साथ ही उनका समय भी बचेगा।