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फाइलों में ही कैद हो गया बस अड्डों का प्लान

Mon, 26 Dec 2016 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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बस अड्डा - फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में पिछले एक दशक में शहर की आबादी पांच से आठ लाख तक पहुंच चुकी है। सहारनपुर रोडवेज को रीजन का दर्जा भी मिल चुका है। लेकिन विडंबना देखिए कि इतने साल बीतने के बावजूद आज भी रोडवेज बसों और यात्रियों की वही बदहाली है जो पहले थी। 
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रोडवेज की सेवाएं यात्रियों की कसौटी पर खरी नहीं उतर पाई हैं। कई सालों से प्रस्तावित नए बस अड्डों का प्लान भी फाइलों में ही दम तोड़ गया है। इस साल भी यात्रियों को बेहतर बस अड्डों की सौगात नहीं मिल पाई है। अब वर्ष 2017 से उम्मीद है कि सहारनपुर को बेहतर बस अड्डा मिले।

रेलवे स्टेशन के पास महाराजा अग्रसेन चौक पर स्थित बस अड्डे से रोजाना सहारनपुर से हरिद्वार, छुटमलपुर, देहरादून, ऋषिकेश सहित अन्य रूटों की ओर जाने वाली 300 से अधिक बसों का संचालन होता है।
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हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और राजस्थान राज्यों से भी बसें यहीं होकर आगे रवाना होती हैं। रोडवेज का परिक्षेत्र मुख्यालय होने के बावजूद यहां इस अड्डे पर इतनी भी जगह नहीं है कि एक बार में कम से कम पांच बसों को ही सही ढंग से खड़ा किया जा सके।

नतीजा यह है कि अधिकतर बसों को अड्डे के अंदर नहीं बल्कि बाहर सड़क पर ही खड़ी कर यात्रियों को बैठाना पड़ता है। इन बसों के कारण हर दिन अतिक्रमण और जाम की समस्या भी झेलनी पड़ती है।

बसों का बोझ कम करने के लिए दिल्ली, शामली, लोनी, अंबाला, जगाधरी, यमुनानगर आदि रूटों के लिए अंबाला रोड पर नगर निगम से कुछ जमीन बस अड्डे के लिए ली गई।

लेकिन यहीं पर निजी बसों और टैंपुओं के सवारियां भरने के कारण यह बदहाली का शिकार है। अड्डा परिसर में गहरे गड्ढे और धूल गुबार भी यात्रियों की मुसीबतें बढ़ा रहा है।

शहर को अतिक्रमण से मुक्त कराने और यात्रियों की सुविधा के लिए शहर के बाहरी हिस्से में रोडवेज इतनी जमीन भी नहीं खोज पाया है, जिसमें दोनों जगहों की बसों का एक बेहतर अड्डा विकसित किया जा सके। या अलग अलग रूटों के हिसाब से दो नए अड्डे ही बनाए जा सकें।

रोडवेज बस अड्डे पर न तो महिला यात्रियों के लिए शौचालय है। न ही सुलभ खानपान की सुविधा। अड्डा परिसर में नाले के गंदे पानी से यात्रियों को निजात नहीं मिली है।  

शहर की सूरत संवारने और यात्रियों को बेहतर रोडवेज अड्डे दिलाने के लिए विधायक से सांसद और मंत्रियों तक ने दावे तो बार बार किए। लेकिन संजीदगी से कोई आगे नहीं आया। यदि रोडवेज के साथ ही जनप्रतिनिधि भी यात्रियों की समस्या को गंभीरता से लेते तो शायद यह नौबत न आती।
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