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एकीकरण से सुधर सकती है सहकारी बैंकों की स्थिति

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एकीकरण से सुधर सकती है सहकारी बैंकों की स्थिति
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सहारनपुर। सहकारी बैंकों के विलय को लेकर शासन स्तर पर कवायद चल रही है। यदि बैंकों का विलय होता है, तो उससे व्यवस्था में कुछ बदलाव होने की उम्मीद भी की जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक, जिला सहकारी बैँक और उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक के एकीकरण को लेकर कमेटी बनाई गई है। इसके बैंकों का विलय होने के बाद की स्थितियों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई है। बैैंकों में कार्यरत कर्मचारी दिन भर इसको लेकर आपस में चर्चा करते रहे। जिले में जिला सहकारी विकास बैंक की 29 शाखाएं और उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक की छह शाखाएं कार्यरत हैं, जबकि उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक की कोई भी शाखा जनपद में नहीं है। जिला सहकारी बैंक साधन सहकारी समितियों के माध्यम से अपनी योजनाओं को क्रियान्वित करता है, जबकि उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक किसानों के लिए सीधे विभिन्न ऋण योजनाओं को चलाता है। इनमें डेयरी, डेयरी प्रसंस्करण, मुर्गीपालन, फूलों की खेती, कृषि यंत्रों से लेकर किसानों को पुराने भवन की मरम्मत के लिए भी ऋण उपलब्ध कराता है। जिले में करीब 3.75 लाख ग्राहक डीसीबी के माध्यम से लेन देन कर रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक की योजनाओं का लाभ लगभग 11057 किसान उठा रहे हैँ। डीसीबी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अशोक कुमार सिंह के मुताबिक जिला सहकारी बैंक का वर्ष 2017-18 का बिजनेस 11,4,43,61 लाख रुपये का है। किसानों को दिए गए ऋण का 60 फीसदी उसे नाबार्ड से मिलता है। जबकि 40 प्रतिशत निजी स्रोत से जुटाना होता है।
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यदि बैंकों का विलय हुआ तो आर्थिक हालत में और सुधार आएगा, लेकिन अभी प्रक्रिया प्रारंभिक स्तर पर हैं। जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक कुछ भी कहना संभव नहीं है कि विलय से क्या बदलाव होगा। -- राम शंकर गौतम, प्रबंधक ग्राम्य विकास बैंक सहारनपुर शाखा।
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एकीकरण की चर्चा पहले भी चली थी, अभी भी इसके लिए एक कमेटी का गठन हुआ है। उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही शासन कोई निर्णय लेगा। इसलिए अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। -- अशोक कुमार सिंह, मुख्य कार्यपालक अधिकारी जिला सहकारी बैंक।
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दोनों बैँकों की कार्यप्रणाली में काफी अंतर है। डीसीबी सहकारी समितियों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराता है। जबकि ग्राम्य विकास बैंक किसानों को सीधे ही ऋण देता है। इसलिए यह प्रयास बेमेल साबित होगा। -- चौधरी विनय कुमार, पूर्व चेयरमैन डीसीबी और प्रदेश उपाध्यक्ष भाकियू।
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