सहारनपुर। मोबाइल फोन कंपनियों द्वारा सड़कों के नीचे बिछाए जा रहे केबिल के जाल ने जलकल विभाग की परेशानी को बढ़ा दिया है। पाइपलाइन के ऊपर केबिल आने की वजह से जलकल विभाग को पाइप लाइनों की लीकेज ठीक करने में परेशानी आ रही है।
पिछले कई साल से मोबाइल फोन कंपनियां अपना नेटवर्क बढ़ाने के लिए शहरों में केबिल बिछा रही हैं। सहारनपुर में पिछले करीब पांच साल से केबिल बिछाने का काम चल रहा है, जो अलग-अलग कंपनियों के द्वारा किया जा रहा है। जल कल विभाग के अनुसार मोबाइल कंपनियों के अधिकारी बिना उन्हें संज्ञान में लिए सड़कों पर केबिल डालने का काम करते आ रहे हैं। इसकी वजह से शहर में अनेक जगहों पर जलकल विभाग की पेयजल पाइप लाइन के ऊपर दो से तीन मोबाइल कंपनियों ने अपने केबिल डाल दिए हैं। इसकी वजह से जलकल विभाग के कर्मचारियों को लीकेज ठीक करने में परेशानी आ रही है।
दिल्ली और लखनऊ से होती है अनुमति
लगभग सभी निजी मोबाइल फोन कंपनियों के पास सड़कों के नीचे केबिल डालने की अनुमति दिल्ली या फिर लखनऊ से होती है। जिसकी वजह से स्थानीय अधिकारी और प्रशासन उनको सड़कों को खोदने और तोड़ने से रोक नहीं पाते हैं। करीब तीन साल पहले एक मोबाइल कंपनी ने शहर भर में अपने टावर खड़े किए। जानकर हैरानी होगी कि ज्यादातर टावर सरकारी जमीनों यानी सड़कों पर खडे़ कर दिए गए। निजी कंपनी होने के बावजूद नगर निगम इसलिए रोक नहीं सका, क्योंकि उनके पास दिल्ली से अनुमति थी।
यह सच है कि अनेक मोबाइल फोन कंपनियों ने अपने केबिल पेयजल की पाइप लाइनों के ऊपर बिछा दिए हैं। ऐसे में हमारे कर्मचारियों को पाइप लाइनों की लीकेज को ठीक करने में परेशानी आ रही है। इतना ही नहीं, अनेक जगहों पर लाइन के लीकेज होने की वजह भी मोबाइल फोन कंपनियां ही बनी हैं, जिनके केबिल डालने के दौरान पाइप की लाइनें फट रही हैं।
- अमरनाथ श्रीवास्तव, महाप्रबंधक, जलकल विभाग।