सहारनपुर। मंडलायुक्त चन्द्र प्रकाश त्रिपाठी ने माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा के अधिकारियों को उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश-2018 के प्रावधानों को सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए। विद्यालयों द्वारा किसी विशेष दुकान से बच्चों को पुस्तकें, मौजे, जूते व ड्रेस खरीदने को बाध्य ना किया जाए।
दिल्ली रोड स्थित कमिश्नर कार्यालय में शुल्क नियामक समिति की बैठक का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि विद्यालय द्वारा लिये जाने वाला शुल्क एवं छात्रों को प्रदान की जाने वाली आधारभूत सुविधायें विद्यालय के वेबसाइटस पर प्रदर्शित की जाएं। उन्होंने कहा कि यदि किसी अभिभावक को विद्यालय के शुल्क व वृद्धि के संबंध में कोई शिकायत है, तो जनपद में जिला विद्यालय निरीक्षक या मंडलीय शुल्क नियामक समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकते है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश-2018 दिये गये प्रावधानों का किसी भी दशा में उल्लंघन ना होने दिया जाएगा।
यह अध्यादेश उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) भारतीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (आईसीएसई) इंटरनेशनल बेक्कलारेट (आईबी) और इंटरनेशनल जनरल सर्टीफिकेट आफ सेकेंडरी एजूकेशन (आईजीसीएसई) या सरकार द्वारा समय-समय पर परिभाषित किन्ही अन्य परिषदों द्वारा मान्यता/संबद्धता प्राप्त ऐसे पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक उच्च प्राथमिक, हाईस्कूल/इंटर कालेजों पर लागू होगा। जिनमें किसी छात्र के लिए कुल संभावित वार्षिक संदेय शुल्क रुपये बीस हजार से अधिक हो। यह अध्यादेश मान्यता प्राप्त/संबद्ध अल्पसंख्यक संस्थाओं पर भी लागू होगा।
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ये है मंडलीय शुल्क नियामक समिति
सहारनपुर। मंडलीय सात सदस्य शुल्क नियामक समिति में योगेश गर्ग चार्टर्ड अकाउंटेंट सदस्य, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, प्रांतीय खंड सहारनपुर, अपर निदेशक कोषागार एवं पेंशन, अभिनव सुशील प्रबंधक डीएवी इंटर कालेज, मुजफ्फरनगर, मनीष कुमार अभिभावक शिक्षक एसोसिएशन राजकीय इंटर कॉलेज, सहारनपुर समिति के सदस्य तथा संयुक्त शिक्षा निदेशक सहारनपुर मंडल सहारनपुर सदस्य सचिव है।