संस्कारों से ही जीवन बनता है महान: आत्मानुभवी
सहारनपुर। आत्मानुभवी महाराज ने कहा कि धार्मिकता शुद्ध संस्कारों की जन्मदाता है। संस्कारों से ही जीवन महान बनता है। सत्संग के माध्यम मनुष्य धर्म की विजय चाहने वाला बन जाता है।
गलीरा रोड स्थित ज्योति विहार कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आत्मानुभवी महाराज ने कहा कि सत्संग श्रवण करने वाला मनुष्य हसंवृत्ति वाला बन जाता है। सत्संग के माध्यम से मानव धर्म की विजय चाहने वाला बनता है। वह जान जाता है कि धर्मांचरण करने से ही धर्म की विजय होगी। कहा कि श्री कृष्ण ने बृजवासियों को अपना वास्तविक रूप दिखाया है, तब बृजवासी जान गए कि एक ही परम शक्ति समूचे ब्राह्मण में समायी हुई है, जिससे सारा संसार चल रहा है। उसी ज्ञान के द्वारा मनुष्य के मन का शुद्धिकरण होता है। जब-जब धरती पर धर्म की हानि और अधर्म का बोलबाला होता है, तब-तब ईश्वर मनुष्य का रूप धारण करके ज्ञान की गंगा बहाकर धर्म की स्थापना करते हैं। इसके साथ ही आत्मानुभवी महाराज ने श्री कृष्ण-रूकमणि विवाह और सुदामा मित्रता का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान मदन धीमान, राजेश धीमान, मनमोहन, मदन सिंह, ज्ञानचंद, योगेश, संजय गुप्ता, जोगेंद्र सिंह, हयात सिंह, जनेश्वर प्रसाद, सतकुमार आदि मौजूद रहे।