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गर्मी के साथ बढ़ा बीमारियों का प्रकोप

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सहारनपुर। गर्मी लगातार भीषण रूप लेती जा रही है, जिसकी वजह से बीमारियों का हमला भी तेज हो गया है। जिला अस्पताल के साथ ही निजी चिकित्सालयों में भी बुखार और पेट से जुड़ी बीमारियों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। बीमारियों के बढ़ने की मुख्य वजह लोगों का साफ-सफाई न रखना और खान-पान के प्रति लापरवाही बरतना माना जा रहा है। चिकित्सकों की मानें तो थोड़ी सावधानी बरत कर हम अपने साथ ही अपने आसपास के लोगों को भी बीमारियों से बचा सकते हैं।
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वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि मलेरिया, टायफाइड और पेट की बीमारियां फैलने की प्रमुख वजह साफ-सफाई न बरतना है। उन्होंने बताया कि गंदगी और जमा पानी में ही मलेरिया और डेंगू का मच्छर पनपता है। साथ ही गलत खानपान की वजह से ही टायफाइड होता है। ऐसे में यदि हम सफाई को अपनाएं और पानी को जमा होने न दें तो मच्छर पैदा नहीं होंगे और बीमारियां बढ़ेंगी नहीं। उन्होंने मच्छर जनित रोगों से बचने के लिए फुल कपड़े पहनने, धूप और गर्मी से बचने के लिए हल्के रंग के सूती वस्त्र पहनने। जरूरी न हो तो तेज धूप में निकलने से बचने, यदि मजबूरी हो तो खूब पानी पीकर और सिर को कपड़े या छाते से ढक कर निकलने की सलाह दी। साथ ही मच्छरों से बचने के लिए मच्छर दानी और मच्छरों को खत्म करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करने की बात कही। उनका कहना है कि बुखार या पेट की बीमारियों की शिकायत होने पर तुरंत नजदीकी अच्छे चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
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बीमारियों से बचने के उपाय
- घरों के पास गंदा पानी जमा न होने दें, साफ पानी को ढककर रखें और नालियों में मिट्टी के तेल का छिड़काव करें।
- कूलर के पानी को हर 24 घंटे में बदलते रहें और फुल बाजू के कपड़े पहनें।
- दूध से बनी मिठाइयों खासकर बासी मिठाइयों को खाने से बचें, बाहर की आइसक्रीम, चाट और जंक फूड खाने से बचें।
- बासी भोजन खाने से बचें, शादियों और होटलों में भी कम खाएं।
-102 या उससे अधिक बुखार होने पर माथे पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें। पैरासिटामॉल भी दे सकते हैं।
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बुखार के जटिल लक्षण
-ब्लड प्रेशर का 90 से नीचे चले जाना और पल्स रेट का 110 से ऊपर जाना।
-हाथ और पैरों का ठंडा होना था बुखार के साथ पेशाब का पीला आना।
-बुखार उतरने के बाद पेट में दर्द होना और उल्टी आना।
-बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी होना और लीवर का साइज बढ़ जाना।
-बुखार में दौरे पड़ना और बेहोशी की हालत में चले जाना।
-आंख, नाक, मुंह, लेटरीन और पेशाब के साथ खून आना।
-शरीर पर लाल दाने आना, पेट का फूल जाना और बेचैनी होना।
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इन लोगों को अधिक खतरा
- शून्य से 12 साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं।
- 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और ओपीडी के मरीजों।
- किडनी और दिल के मरीजों।
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गर्मी के दिनों में बुखार और पेट से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ना लाजिमी है मगर इस बार अभी तक पिछले वर्ष की तुलना में बीमारियों का प्रकोप कम है। विभाग लोगों को मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से बचने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। लोगों को भी चाहिए कि वह बीमारियों से बचने के लिए साफ-सफाई अपनाएं और खानपान में सावधानी बरतें।
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डॉ. बीएस सोढी, सीएमओ।
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