वसीम रिजवी के बयान पर उलमा आग बबूला
देवबंद (सहारनपुर)। मदरसों में दी जानी वाली शिक्षा को आईसीएससी, सीबीएससी या राज्य शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम के मुताबिक बनाए जाने तथा इनमें प्रतिदिन राष्ट्रगान को अनिवार्य किए जाने वाले शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के बयान पर देवबंदी उलमा आग बबूला हो गए हैं। उलमा का कहना है कि मुसलमान और दीनी इदारों को वसीम रिजवी से देशभक्ति का सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है।
मंगलवार को शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैय्यद वसीम रिजवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर मदरसा शिक्षा नीति में दीर्घकालिक सुधार करने का सुझाव दिया है। विवादित बयानों को लेकर उलमा के निशाने पर आ चुके वसीम रिजवी ने एक बार फिर से मदरसों से संबंधित बयान देकर उलमा की नाराजगी मोल ले ली है। मदरसा दारुल उलूम अशरफिया के मोहतमिम मौलाना सालिम अशरफ कासमी का कहना है कि हमें देशभक्ति का सबक सिखाने वाले वसीम रिजवी होते कौन हैं। देश को आजाद कराने में मदरसों ने अविस्मरणीय योगदान दिया है। जिसके बारे में शायद रिजवी को जरा भी ज्ञान नहीं है। उन्होंने कहा कि हम भी आधुनिक शिक्षा के पक्ष में हैं और इसे सुनिश्चित करने के लिए कदम भी उठाए जा रहे हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि छात्रों पर अधिक बोझ लाद दिया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पर्वों पर मदरसों में नियमित रूप से ध्वजा रोहण किया जाता है और राष्ट्रगान भी गाया जाता है। इतिहास गवाह है कि ब्रिटिश शासन के दौरान देश की आजादी के लिए हजारों उलमा ने बलिदान किया है। मदरसा दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ कासमी का कहना है कि वसीम रिजवी अपनी औछी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। वह बार बार मदरसों और मुसलमानों की छवि को धूमिल करने वाले बयान दे रहे हैं। जबकि सब जानते हैं कि दीनी इदारों में देश प्रेम की तालीम दी जाती है और तिरंगा भी फहराया जाता है। रिजवी जैसे लोग सरकार की नजरों में बने रहने के लिए इस प्रकार की बयानबाजी कर रहे हैं।