सहारनपुर। जिले में मदरसों के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों के खिलाफ एक बार शिकंजा कसने के बाद जिला अल्पसंख्यक विभाग शांत बैठ गया। सिर्फ पहले चरण की कार्रवाई के बाद बाकी मदरसों की जांच विभाग की उदासीनता की भेंट चढ़ गई है।
जनपद में 754 मदरसे मान्यता प्राप्त थे। शासन ने मदरसा संचालकों को ऑनलाइन पंजीकरण कराने के निर्देश दिए थे। जिले में 652 मदरसा संचालकों ने ही पंजीकरण कराया, जिन्होंने पंजीकरण नहीं कराया था, उनकी मान्यता रद्द हो गई थी। इसके बाद विभाग ने मौके पर जाकर जांच शुरू की तो 17 मदरसे अस्तित्व में नहीं मिले थे, जिनकी मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द करने के साथ 12 मदरसों को नोटिस भेजा गया था। इन 12 मदरसों की जांच अब मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से की जाएगी। पहले चरण की कार्रवाई के बाद जिला अल्पसंख्यक विभाग शांत बैठ गया। बाकी मदरसों की जांच के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। उधर, सूत्र बताते हैं कि जांच की फाइलों को भी दबा दिया गया है, जो मदरसे मानकों के अनुरूप नहीं है कि उनके कागजात पूरे कराने का खेल भी शुरू हो गया।
तो क्या नहीं होगी रिकवरी
सहारनपुर। फर्जीवाड़े से चल रहे 17 मदरसों की मान्यता रद्द की गई, लेकिन इन मदरसों ने सरकार से जो अनुदान प्राप्त किया है। उसकी रिकवरी के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया, जबकि विभाग के अधिकारियों ने दावा किया था कि आर्थिक अनुदान की रिकवरी की जाएगी।
बड़े पैमाने पर चल रहा खेल
सहारनपुर। जिला अल्पसंख्यक विभाग ने सिर्फ पहले चरण की कार्रवाई की। सूत्र बताते हैं कि जनपद में मदरसों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। ऐसे कई मदरसे संचालित है, जो सिर्फ एक-एक कमरे में चल रहे हैं, लेकिन जांच की तरफ अब विभाग के कदम आगे नहीं बढ़ रहे हैं। क्योंकि, जांच में विभाग के अधिकारियों की गर्दन भी फंस सकती है।
शासन के निर्देशानुसार जनपद के एक-एक मदरसे की जांच कराई जाएगी, जो भी गलत पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।
- पीके पांडेय, जिलाधिकारी