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मृदा परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर ही दे बागों में उर्वरक

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मृदा परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर ही दे बागों में उर्वरक
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उद्यान वैज्ञानिकों ने कहा कि बागों में उर्वरक प्रबंधन मृदा परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर ही होना चाहिए। उर्वरक की आधी मात्रा सिंतबर और आधी मात्रा जनवरी, फरवरी में देनी चाहिए।
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औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र केन्द्रके संयुक्त निदेशक राजेश प्रसाद ने बताया कि वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि आम व लीची के बागों में उर्वरक पेड़ों की आयु के अनुसार देना चाहिए। एक वर्ष के पेड़ में यूरिया - 225 ग्राम, सिंगल सुपर फास्फेट -300 ग्राम व एमओपी-170 ग्राम प्रति पेड़ दी जानी चाहिए। दो वर्ष के पेड़ में यह मात्रा दोगुनी, इसी प्रकार 10 वर्ष या उससे ऊपर की आयु के पेड़ में दस गुनी मात्रा देनी चाहिए। इन उर्वरकों की आधी मात्रा फल तुड़ाई के तुरंत बाद से सितंबर तक तथा आधी मात्रा जनवरी-फरवरी में दी जानी चाहिए। 10 वर्ष से ऊपर के आम के पेड़ों में जिंक सल्फेट 250 ग्राम प्रति पेड़, कॉपर सल्फेट-250 ग्राम और सुहागा-250 ग्राम को मुख्य तत्वों के 15 दिन के अंतर पर बारीक पीस कर कम्पोस्ट के साथ मिलाकर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान बागों की मिट्टी की जांच कराकर ही उर्वरकों का प्रयोग करें। उर्वरक तने से डेढ़ फिट से दो फिट छोड़कर पूरे पेड़ के फैलाव के नीचे बिखेर देना चाहिए और गुड़ाई करके हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
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