सहारनपुर। जनपद के तमाम विकास कार्यों को गति देने के लिए हर वर्ष बनाई जाने वाली जिला योजना महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है। दो वर्ष की योजनाओं में प्रस्ताव के मुताबिक बजट नहीं मिला है, जिससे विकास कार्य अधर में लटके पड़े हैं। इस वर्ष सत्ता परिवर्तन होने के बाद जिला योजना की पहली बैठक हो चुकी है। शासन को 349 करोड़ 35 लाख का बजट भेजा गया है। बजट को शासन से अभी हरि झंडी नहीं मिली है। दो वर्षों से जिला योजना की परियोजनाएं पर्याप्त बजट न मिलने के कारण पूरी नहीं हो पाई हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2015-16 की जिला योजना बैठक में 341 करोड़ छह लाख रुपये का बजट बनाकर शासन को भेजा गया था। मगर शासन की ओर से 149 करोड़ 74 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। इसी तरह 2016-17 की जिला योजना में 351 करोड़ 15 लाख रुपये का बजट बनाकर शासन को प्रेषित किया गया। इस बार 149 करोड़ 49 लाख रुपये ही शासन ने सहारनपुर के विकास कार्यों के स्वीकृत किए। दोनों बार जनप्रतिनिधियों की मौजूद में हुई प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में पूरे जनपद के विकास कार्यों का खाका तैयार कर बजट बनाया गया, लेकिन शासन ने ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर धनराशि स्वीकृत की है। दोनों योजनाओं में प्राप्त हुई धनराशि जनपद के 45 विकास कार्यक्रमों से संबंधित विभागों को सीधे शासन से आवंटित की गई। पर्याप्त बजट ना मिलने के कारण जिला योजना तय परियोजनाएं पूरी नहीं हो पाई हैं। इस बार जिला योजना की बैठक 21 जून को प्रदेश के कृषि और प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में हो चुकी है, जिसमें 349 करोड़ रुपये का बजट बनाकर शासन भेजा गया है। अभी तक शासन की ओर से बजट को हरि झंडी नहीं मिली है।
इन कार्यक्रमों के लिए आवंटित होती है धनराशि
सहारनपुर। जिला योजना में बजट पास होने के बाद शासन से आने वाली धनराशि कृषि विभाग, गन्ना विकास कार्यक्रम, लघु व सीमांत कृषकों की सहायता, उद्यान विभाग, पशु पालन विभाग, दुग्ध विकास, मत्स्य विभाग, सहकारिता, ग्राम्य विकास के विशेष कार्यक्रम, रोजगार कार्यक्रम, पंचायती राज विभाग, सामुदायिक विकास ग्रामीण विभाग, राजकीय, लघु सिंचाई एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्त्रोत, खादी एवं ग्रामोद्योग, सड़क एवं पुल, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यटन, प्राकृतिक शिक्षा, प्रादेशिक विकास दल, खेलकूद, एलोपैथिक चिकित्सा, परिवार एवं कल्याण, आयुर्वेदिक चिकित्सा, होम्योपैथिक चिकित्सा, पेयजल (जल निगम ग्रामीण), ग्रामीण स्वच्छ पंचायती राज, आवास, छात्रवृत्ति, पिछड़ी जाति कल्याण, सेवायोजन, शिल्पकार प्रशिक्षण आईटीआई, समाज कल्याण कार्यक्रम, विकलांग कल्याण कार्यक्रम, महिला प्रोबेशन, पुष्टाहार कार्यक्रम, बाढ़ नियंत्रण, प्रावैधिक शिक्षा जैसे कार्यक्रमों के लिए भेजी जाती है।
होने हैं यह महत्वपूर्ण कार्य
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करना
शिक्षा को उच्च स्तर पर लाना
सड़कों को बेहतर करना
जर्जर हो चुके पुलों का जीर्णोद्घार
आयुर्वेदिक और होम्योपैथी चिकित्सा को बढ़ावा देेना
देहात क्षेत्रों के विद्युत के जर्जर तारों को बदलना
स्वच्छ और शुद्धजल की आपूर्ति
सहारनपुर को खुले में शौच से मुक्त बनाना
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जिला योजना 2017-18 बजट बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। उम्मीद है कि इस बार पर्याप्त बजट जनपद के विकास के लिए मिल जाएगा।
----- प्रमोद कुमार पांडेय, जिलाधिकारी
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सरकार को चाहिए कि वे पूरा बजट जनपद के विकास के लिए भेजे। वैसे तो प्रदेश की भाजपा सरकार ने सभी योजनाओं को छिन्न-भिन्न कर दिया है। सपा सरकार में सहारनपुर तेजी से विकास की राह पर बढ़ रहा था। चार माह पूर्व बनी योगी सरकार ने जिले के विकास पर ब्रेक लगा दिया है।
संजय गर्ग, नगर विधायक
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जिला योजना की बैठक के जरिए ही विकास का खाका तैयार किया जाता है। मगर, पिछले कुछ साल में राज्य सरकार गंभीर नहीं थी। भाजपा की योगी सरकार जिला योजना के प्रति गंभीर है और जिले के विकास को लेकर हम भी सरकार में अपनी बात रखते रहेंगे।
राघव लखनपाल शर्मा, सांसद