‘जरा इक रात उन्हें भी सरहद पर भेजो’
रामपुर मनिहारान। नगर में साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें आमंत्रित कवियों, आलोचकों और कहानीकारों ने अपनी रचनाओं को पढ़कर खूब वाहवाही लूटी। कवियों ने देशभक्ति से लेकर सामाजिक मुद्दों पर कुछ रचनाएं पढ़ी। मौजूदा हालात बयां करते हुए कवियों के कटाक्ष भी श्रोताओं को खूब पसंद आए।
मोहल्ला इकराम में उर्दू आलोचक एवं कहानीकार डा. मोहम्मद मुस्तमिर के आवास पर यह गोष्ठी हुई। इसमें दिल्ली से आए आलोचक हक्कानी अल कासमी, कहानीकार डा. शमा अफरोज जैदी, जामिया मिलिया इस्लामिया नई दिल्ली की रिसर्च स्कॉलर सालिहा सिद्दीकी, राजकीय डिग्री कालेज देवबंद के उर्दू के प्रोफेसर डा. अलिफ नाजिम, राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित डा. जमील अहमद, डा. जहूर अहमद, डा. समरयाब ने अपनी रचनाएं पेश कर लोगों को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया।
डा. समरयाब ने अपने काव्य पाठ को पेश करते हुए कहा-तुम्हारा भाई बेटा भी है कोई फौज में बोलो, नहीं है तो जरा इक रात की खातिर उन्हें सरहद पे भेजो ना, तुम्हे मालूम हो जायेगा फौजी कैसे रहते हैं। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित डा. जमील अहमद ने पढ़ा- बस्ती में आज फिर तूफान आ गया, बच्चे की मौत का सामान आ गया। इसी तरह अन्य रचनाएं पढ़ी गईं। डा. मुस्तमिर ने आगंतुकों का आभार जताया।