देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम से शियाओं को लेकर जारी हुए फतवे ने विवाद खड़ा कर दिया है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इसको लेकर बहस छिड़ी हुई है। सोशल मीडिया पर से तेजी से वायरल हो रहे एक मैसेज में दारुल उलूम का नाम लेकर फतवे को फर्जी करार दिया जा रहा है, लेकिन अभी तक इस संबंध में दारुल उलूम का कोई भी ओहदेदारान सामने नहीं आया है। हालांकि उक्त मैसेज को वायरल करने वाला संस्था का ही एक जिम्मेदार है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मैसेज में जारी फतवे को फर्जी करार दिया जा रहा है और साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि एक बार फिर शिया सुन्नी के बीच नफरत फैलाने का खेल खेला जा रहा है। उसमें कहा गया है कि फर्जी फतवे में सुन्नियों को हिदायत दी गई है कि वो शिया मसलक को मानने वालों के यहां इफ्तार पार्टी या शादी की दावत में जाने से परहेज करें। इसके साथ ही वायरल मैसेज में यह भी कहा गया है कि फतवे को लेकर शिया और सुन्नी दोनों मसलकों के धर्मगुरुओं के साथ साथ दारुल उलूम देवबंद ने इसकी जमकर मजम्मत (निंदा) की है। फतवे को किसी की शरारत करार दिया गया है, जबकि इस मामले में अभी तक दारुल उलूम के किसी भी ओहदेदारान ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। विवाद को जन्म देने वाला फतवा सपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष सिकंदर अली ने लिया था। जिसमें शियाओं की इफ्तार पार्टी में जाने और शादी में शरीक होने या खाने पीने को लेकर सवाल किया गया था। जिस पर दारुल उलूम के मुफ्तियों ने इसमें जायज और नाजायज शब्द का इस्तेमाल न कर केवल इससे परहेज रखने की सलाह दी थी। जिसके बाद यह फतवा इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया में बहस का मुद्दा बना हुआ है।
सुन्नी भाई बुलाएंगे तो दावत पर जरुर जाएंगे : रजा
देवबंद। शिया समुदाय से सपा शासन में दर्जा प्राप्त पूर्व राज्यमंत्री रहे ईसा रजा ने कहा कि शिया मुसलमानों को सुन्नी मुसलमानों के साथ खाने पीने में कोई दिक्कत नहीं है। भले ही सुन्नी उनके यहां इफ्तार आदि में शिरकत न करें, लेकिन अगर सुन्नी मुस्लिम उन्हें अपने घर पर इफ्तार की दावत पर बुलाएंगे तो वह जरुर जाएंगे। दारुल उलूम से जारी फतवे पर ईसा रजा ने कहा कि सुन्नी मुसलमान कलमा के शरीक होने के नाते से उनके भाई हैं। इसलिए उन्हें सुन्नी मुसलमानों के यहां इफ्तार या अन्य कार्यक्रम में जाने में क्या एतराज है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में शिया और सुन्नी मिल जुलकर रहते हैं।