सहारनपुर। सांप्रदायिक एकता के प्रतीक बाबा श्री जाहरवीर की शान में म्हाड़ी पर लगने वाले मेले में बरसात के दौरान भी श्रद्धालुओं के कदम नहीं डगमगाए। दूसरे दिन बारिश के दौरान म्हाड़ी पर करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने निशान चढ़ाकर मन्नतें मांगी। म्हाड़ी पर जगह-जगह कढ़ी, चावल के भंडारों का आयोजन किया गया।
बृहस्पतिवार की रात दस बजे तक नेजे सहित 26 छड़ियां बैंडबाजों संग म्हाड़ी पर पहुंच गई थीं। लाखों की संख्या में अंबाला रोड स्थित काल भैरव विश्रामपुरी भैरव मंदिर से गंगोह रोड और म्हाड़ी तक श्रद्धालु मौजूद थे। शाम के समय शुरू हुई बारिश शुक्रवार को भी नहीं रुकी। बरसात के दौरान भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु रातभर म्हाड़ी पर पहुंचते रहे। पूरी रात म्हाड़ी पर बाबा श्री जाहरवीर की वीरता के किस्से छड़ियों के भक्त श्रद्धालुओं को सुनाते रहे। म्हाड़ी पर बने 26 छड़ियों के स्थानों पर कढ़ी, चावल के भंडारों का आयोजन हुआ। बाबा श्री जाहरवीर के जयकारों से म्हाड़ी स्थल पर वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु नाचते गाते रहे। शुक्रवार को मेले के दूसरे दिन भी बारिश के बीच गंगोह मार्ग पर श्रद्धालुओं का सैलाब दिखाई दिया। पुलिस-प्रशासन के मुताबिक मेले के दूसरे दिन भी हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और पड़ोसी जनपदों के करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने म्हाड़ी पर निशान चढ़ाए। वहीं, पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। गंगोह मार्ग और म्हाड़ी पर चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात रही। एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि म्हाड़ी मेले को लेकर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं।
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बरसात से किचकिच हुआ म्हाड़ी स्थल
सहारनपुर। बारिश के कारण म्हाड़ी स्थल पर जगह-जगह कीचड़ फैल गया। जिससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस बार नगर निगम ने म्हाड़ी मेले को लेकर कोई खास इंतजाम नहीं किए। इस कारण श्रद्धालुओं को दिक्कत हुई। म्हाड़ी परिसर में फैले कीचड़ से फिसलकर कई श्रद्धालु गिरकर चोटिल हो गए।
आज लौटेंगी छड़ियां
सहारनपुर। म्हाड़ी मेले के तीसरे दिन शनिवार को नेजा सहित 26 छड़ियां वापस लौटेंगी। म्हाड़ी पर सुबह आठ बजे पूजन के बाद नेजा सहित सभी छड़ियां काल भैरव विश्रामपुरी भैरव मंदिर के लिए चलेंगी। नेजे के पीछे सरदार और अन्य छड़ियां चलेंगी। दोपहर 12 बजे तक सभी छड़ियां मंदिर में पहुंच जाएंगी, जो शाम पांच बजे तक मंदिर के बाहर मेला गुघाल परिसर में खड़ी रहेंगी। यहां भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर प्रसाद चढ़ाएंगे। शाम के समय छड़ियां अपने-अपने स्थानों के लिए चल पड़ेंगी। इसके साथ ही शहर में एक बार फिर लौटती छड़ियों के बसेरों के आयोजन शुरू हो जाएंगे। तीन दिन तक लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर छड़ियों के पूजन के साथ भंडारे का आयोजन करेंगे।