देवबंद (सहारनपुर)। अयोध्या के बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि विवाद में बौद्ध समुदाय के व्यक्ति द्वारा विवादित जमीन को बौद्ध स्थल बताने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर किए जाने के मामले में उलमा का कहना है कि हर व्यक्ति को कोर्ट में जाकर अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त है। जहां तक विवादित जमीन पर दावा पेश करने का सवाल है तो यह सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि वो किसकी मिल्कियत है।
अयोध्या की विवादित भूमि को बौद्ध स्थल बताने वाली याचिका दायर किए जाने के मुद्दे पर मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ का कहना है कि मुल्क आजाद है इसलिए यहां हर व्यक्ति को यह अधिकार प्राप्त है की वो सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य जगह जाकर अपनी बात रख सकता है। बाबरी मस्जिद का मामला अदालत में विचाराधीन है। जिस पर लगातार सुनवाई भी चल रही है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलमा-ए-हिंद समेत अन्य संगठन यह बात पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट ही यह तय करेगा कि अयोध्या में किसकी मिल्कियत है। अदालत का जो भी फैसला होगा उसे मुल्क का मुसलमान सम्मान के साथ मनेगा। मुफ्ती अहमद ने कहा कि अयोध्या विवाद के नाम पर फिरकापरस्त ताकतों को चुनाव में लाभ उठाने का कोई मौका नहीं दिया जाएगा। जिस व्यक्ति ने कोर्ट में रिट दाखिल की है उसे इसका अधिकार है प्राप्त। अब इस पर कोर्ट क्या रुख अपनाता है यह कोर्ट का अपना मामला है।