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अनाड़ी चालकों के हाथों में स्कूली बच्चों की जान

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सहारनपुर। छुटमुलपुर में दो छात्रों की मौत के बाद एक बार फिर यह बात साबित हुई है कि स्कूली बच्चों की जान अनाड़ी चालकों के हाथों में है। एक के बाद एक हो रही दुर्घटनाओं से न तो प्रशासन और ना ही अभिभावक सबक लेने को तैयार हैं। हर हादसे के बाद शोर मचता है। पुलिस भी कुछ दिन सड़क पर आकर कार्रवाई की औपचारिकता पूरी कर मुंह मोड़ लेती है। ऐसे में दुर्घटनाओं की श्रृंखला को रोक पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा हैं।
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जिले भर में स्कूलों की तो कमी नहीं है, मगर ट्रांसपोर्ट की समुचित व्यवस्था न होने के कारण अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए असुरक्षित वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। शहर हो या फिर देहात सैकड़ों बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने में ई-रिक्शा और थ्री व्हीलर का प्रयोग किया जा रहा है। ई-रिक्शा के लिए चालक को न तो किसी तरह प्रशिक्षण और न ही किसी प्रमाण-पत्र की जरूरत पड़ती है। उठाया ई-रिक्शा और लेकर सड़क पर उतर गए। सहारनपुर की सड़कों पर नाबालिग भी ई-रिक्शा थामे हुए सड़कों पर दौड़ रहे हैं। कुशीनगर के हादसे के बाद डीजीपी ओपी सिंह ने पुलिस को अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करने को कहा था कि स्कूली बच्चों की जिंदगी से किसी तरह का खिलवाड़ न होने पाए। तीन दिन जरूर पुलिस ने स्कूली वाहन चालकों से नियमों का पालन कराया था।
सोमवार को स्कूल खुले थे और अगले ही दिन मंगलवार को छुटमलपुर में हुए हादसे ने अभिभावकों को झकझोर दिया है। चालक का अनाड़ीपन और रोडवेज चालक की लापरवाही दो मासूमों की मौत का सबब बन गई। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब अनाड़ी चालकों के हाथों स्कूली बच्चों की जान गई है। सहारनपुर में स्कूल बंद होने से कुछ दिन पूर्व ही गागलहेड़ी रोड पर एक अनाड़ी स्कूली वैन चालक ने बच्चों से भरी वैन को तेजी में निकालने के चक्कर में एक दीवार में दे मारा। जिससे वैन पलट गई। आधा दर्जन बच्चे घायल हो गए थे। यही नहीं पेपर मिल रोड पर स्कूली बच्चों से भरा थ्री व्हीलर भी पलट चुका है। मानकों के अनुसार स्कूलों में सिर्फ मिनी बस और बस ही लगाई जा सकतीं हैं। थ्री-व्हीलर और ई-रिक्शा में बच्चों को नहीं ले जाया जा सकता, मगर इन मानकों की सहारनपुर में उड़ रही धज्जियां किसी से छिपी नहीं है।
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--वाहन संचालन में स्कूली खेल
शहर के कुछ नामी स्कूलों ने वाहन संचालन के नाम पर अधिकारियों को ही नहीं अभिभावकों को भी पूरी तरह से गुमराह कर रखा है। स्कूलों ने अपने निजी वाहनों को लगाने की बजाय, बस संचालकों को ठेके पर अपने स्कूल के बच्चे लाने के लिए बसें एवं अन्य वाहन लगवा लिए हैं। जिससे स्कूल संचालक अपनी जिम्मेदारी से भी बच गए और स्कूल बसों से होने वाली कमाई भी उनकी जेब में पहुंची तथा बच्चे भी उनके स्कूल पहुंच रहे हैं। प्रशासन द्वारा कार्रवाई करने की चेतावनी दिए जाने पर सभी संचालक अपने हाथ खड़े कर रहे हैं कि उनकी कोई निजी बस नहीं है,
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-- जागा परिवहन विभाग, आज से होगी कार्रवाई
छुटमुलपुर में हुए हादसों के बाद संभागीय परिवहन विभाग जाग गया है। परिवहन अधिकारी कपिल देव का कहना है अभिभावकों को अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूक होना चाहिए। स्कूली बसों में ही अपने बच्चों को स्कूल भेजें। अप्रशिक्षित चालकों के हाथों में अपने बच्चों को देकर उनकी जान से खिलवाड़ न करें। उन्होंने कहा कि स्कूली वाहनों के खिलाफ बुधवार से अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजते समय यह देखना चाहिए कि उनका बच्चा कैसे वाहन में सफर कर रहा हैं। वह लगातार अपील करते रहे है कि बच्चों को खटारा वाहनों अथवा अनाड़ी चालकों के साथ ना भेजा जाए। चालक प्रशिक्षित होने के साथ विश्वसनीय होना चाहिए।
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-सुरेन्द्र चौहान, संयोजक प्रोगेसिव स्कूल फोरम।
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