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ग्लोडियोलस फूल की खेती की ओर बढ़ा किसानों का रूझान

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सहारनपुर। बढ़िया आमदनी के चलते किसानों का रुझान ग्लोडियोलस फूलों की खेती ओर तेजी से बढ़ रहा है। चार माह में तैयार होने वाली यह फसल वर्ष में तीन बार ली जा सकती हैं। जनपद में इस पुष्प की खेती करीब 25 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हो रही है।
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परंपरागत खेती के साथ ही किसान कृषि विविधिकरण को भी तेजी से अपना रहे हैं। इसके चलते जनपद में सब्जियों से लेकर फूलों की खेती का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। इसकी खेती के लिए सितंबर से जनवरी तक का समय उपयुक्त होता है। इसकी खेती के लिए खेत को तैयार कर उसमें मेड़ बना ली जाती हैं। मेड़ से मेड़ की दूरी 60 सेंटीमीटर और बीज से बीज की दूरी 20 से 30 सेंटीमीटर रखी जाती है। इसके बीज को मेड़ पर ही रोपा जाता है। इसकी खेती में प्रति बीघा करीब 10 हजार स्पाइक या डंडी प्राप्त होती है। बाजार की जिसकी कीमत 3 से 10 रुपये प्रति स्पाइक आसानी से मिल जाती है। जिससे एक बीघा खेत से 40 से 50 हजार रुपये प्राप्त हो जाते हैं। साथ ही आगामी वर्ष के लिए बीज भी मिल जाता है। चार महीने की यह फसल वर्ष में तीन बार हो सकती हैं। जिले में मुजफ्फराबाद, देवबंद, पुंवारका आदि विकास खंडों में इसकी खेती हो रही है।
इन प्रजातियों का है क्रेज
बाजार में सर्वाधिक मांग हॉलेंड के फूलों की होती है। क्योंकि इनकी स्पाइक का साइज बड़ा होता है। ग्लोडियोलस में व्हाइट प्रोसपर्टी, रेड ब्यूटी, फ्रेडशिप और अमेरिकन ब्यूटी आदि प्रजातियों की सर्वाधिक मांग रहती है। स्थानीय किस्मों में रश्मि, स्वर्ण रेखा, हिमानी, मयूर किसानों को काफी पसंद है।
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जिले में किसानों में ग्लोडियोलस की खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा है। इसकी फसल केवल चार माह में तैयार हो जाती है। इसलिए वर्ष में तीन बार इसका उत्पादन लिया जा सकता है। बाजार में अच्छी मांग और बढ़िया भाव के चलते किसानों में इसका क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है। जनपद में 25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में ग्लोडियोलस की खेती हो रही है।
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- अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
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