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477 करोड़ 84 लाख के बजट को हरी झंडी, 21 प्रस्ताव पास

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सहारनपुर। नगर निगम बोर्ड की बैठक सर्किट हाउस में हुई, जिसमें शहर के विकास के लिए 477 करोड़ 84 लाख रुपये से अधिक के बजट पर मुहर लगा दी गई। बैठक में रखे गए कुल 23 प्रस्तावों में से दो प्रस्तावों को स्थगित किया गया। शेष 21 प्रस्तावों को आंशिक संशोधन के साथ पास कर दिया गया। कई समस्याओं को लेकर पार्षदों ने हंगामा भी किया। इससे पहले मेयर कार्यालय में हुई अनौपचारिक बैठक में भी जमकर हंगामा हुआ।
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बजट को लेकर कार्यकारिणी समिति की बैठक 24 फरवरी को मेयर संजीव वालिया कार्यालय में हुई में हुई थी, जिसमें शहर के विकास के लिए 472 करोड़ 11 लाख 98 हजार रुपये का बजट पास किया गया था। शनिवार की अपराह्न तीन बजे सर्किट हाउस में हुई बोर्ड बैठक में बजट को आंशिक संशोधन के साथ रखा गया। फाइनल बजट 477 करोड़ 84 लाख 55 हजार रुपये का बनाया गया, जिसे सर्व सम्मति से हरी झंडी दे दी गई। पार्षद मंसूर बदर, शहजाद और तहजीब आदि तैयार किए गए बजट में गृह और जल कर के लक्ष्य में वृद्धि न करने को मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 में 13 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें करीब चार करोड़ रुपये ही नगर निगम वसूल पाया। चूंकि सहारनपुर स्मार्ट सिटी में शामिल हुआ है। ऐसे में लक्ष्य 13 करोड़ से बढ़ाया जाना चाहिए था, मगर फिर से लक्ष्य 13 ही करोड़ रखा गया है। यानी नगर निगम इनकम बढ़ाना नहीं चाहता है। उन्होंने नगर निगम के पास आवारा पशुओं को रखने के लिए कांजी हाउस न होने पर भी सवाल उठाए। कहा कि उन्होंने छह जनवरी की बैठक में कांजी हाउस का मुद्दा उठाया था। कहा कि कांजी हाउस न होने की वजह से गाय और अन्य पशु सड़कों पर विचरण करते हैं, जो कई बार सड़क हादसों की वजह बन चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अन्य श्रोतों जैसे दुकान किराया, जनमंच प्रेक्षागृह किराया आदि में आय घटने पर भी नगर निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। बैठक में कुल 23 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से प्रस्ताव संख्या दस और 22 को स्थगित कर दिया गया। शेष प्रस्तावों में से तीन प्रस्ताव को आंशिक संशोधन के साथ तथा बाकी को बिना किसी आपत्ति के पास किया गया। कुछ अहम फैसले भी लिए गए, जिनमें सड़क को तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाने का निर्णय लिया गया। जहां सड़कों की चौड़ाई कम है वहां सीमेंटेड डिवाइडर बनाने की बजाय गार्डर लगाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए पार्षद आशुतोष सहगल ने सुझाव रखा था। कुछ विभिन्न मुद्दों को लेकर बैठक में हंगामा भी हुआ। इससे पहले पूर्वाह्न 11 बजे मेयर कार्यालय में अनौपचारिक बैठक में भी पार्षदों ने हंगामा किया।
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बोर्ड की बैठक में पास हुए प्रमुख प्रस्ताव
-गांधी पार्क के पास क्षतिग्रस्त शौचालय के स्थान पर दुकान और नेहरू मार्केट में श्रीराम चौक से अश्फाक उल्ला खान चौक से पहले तक दोनों ओर फुटपाथ बनाए जाएंगे।
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-घंटाघर चौक से श्रीराम चौक तक आरसीसी डिवाइडर एवं सड़क के दोनों ओर फुटपाथ बनाए जाएंगे।
-पथ प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए पथ प्रकाश विभाग में 36 विद्युत मिस्त्री और विद्युत हेल्पर रखे जाएंगे।
-पथ प्रकाश के लिए शहर भर की लाइटों को बदलकर एलईडी लाइटें लगवाई जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए दरें प्राप्त कर निविदा की कार्यवाही होगी।
-धोबीघाट का नाम गंगाघाट होगा।
-शहर की नई कॉलोनियों को विकसित करने के लिए उनमें बुनियादी सुविधाएं दी जाएंगी।
-शाकंभरी विहार मुख्य रोड पर जैन कॉर्नर से ओम साईं प्रापर्टी तक हॉट प्लांट द्वारा सड़क का निर्माण होगा।
-जैन मंदिर के पास गोल कोठी चौक का नाम बदलकर भगवान महावीर चौक रखा जाएगा।
-कान्हा उपवन के क्रियान्वयन के लिए ग्राम सांवलपुर नवादा में ग्राम सभा की जमीन को इस्तेमाल में लाया जाएगा।
-नगर निगम के गेस्ट हाउस के सामने न्यू गैराज में एक कमरा, एक हॉल और टिन शेड का निर्माण होगा।
-माता गढ़ में क्षतिग्रस्त पुलिया की जगह नई पुलिया और एप्रोच का कार्य होगा।
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जांच के लिए कमेटी गठित
बोर्ड की बैठक में वार्ड तीन की पार्षद शिखा बेनीवाल समेत कई पार्षदों ने सफाईकर्मी द्वारा कथित तौर पर 25 हजार रुपये मांगने का मामला उठाया। शिखा बेनीवाल ने कहा कि उनके पास सफाईकर्मी द्वारा किसी काम के लिए 25 हजार रुपये मांगे जाने का ऑडियो भी है। उन्होंने सफाईकर्मी पर जनहित में काम न करने का आरोप भी लगाया। मेयर ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया।
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सीमा विवाद को लेकर पार्षदों में नोकझोंक
शहर में वार्डों की सीमा विवाद भी पार्षदों के बीच है। वार्ड 66 और वार्ड 43 के क्षेत्रों को लेकर विवाद है। शनिवार की पूर्वाह्न हुई बोर्ड की अनौपचारिक बैठक में वार्ड 66 के पार्षद गुलशेर ने वार्ड 43 के पार्षद पर उनके वार्ड में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया। इस बात को लेकर दोनों पार्षदों के बीच नोकझोंक हुई। इसके बाद मेयर संजीव वालिया को खड़े होकर बीच बचाव करना पड़ा। इस बैठक में भी तमाम कार्यों को लेकर पार्षदों के बीच हंगामा हुआ। पार्षदों ने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर जनहित के कार्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। हैरत की बात यह रही कि इस बैठक में नगर निगम के कुछ ठेकेदारों के साथ ही सफाईकर्मी भी मौजूद रहे। एक मामले को लेकर सफाईकर्मियों ने मेयर की कुर्सी पर जाकर हंगामा भी किया। हंगामा करने वालों को उन्हीं के साथी बमुश्किल बाहर ले गए।
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