देवबंद (सहारनपुर)। क्षेत्र में कच्ची शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। कच्ची शराब माफिया बड़े पैमाने पर रेक्टीफाइड केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं। जो उन्हें हरियाणा से उपलब्ध हो रहा है। इससे खतरा बना हुआ है कि क्षेत्र में फिर से वर्ष 2009 के जहरीली शराबकांड की पुनरावृत्ति न हो जाए।
देवबंद क्षेत्र में अवैध शराब कारोबारियों पर प्रतिबंध लगाने में आबकारी और पुलिस विभाग पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। लाख कोशिशों के बावजूद भी इस धंधे पर पूर्णतया पाबंदी नहीं लगा पाया है। जिसके चलते क्षेत्र में यह कारोबार लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2009 में जहरीली शराब पीने से नगर एवं देहात क्षेत्र में 36 लोगों की मौत हो गई थी। शासन ने घटना का संज्ञान लिया तो आबकारी और पुलिस विभाग हरकत में आया और आनन फानन में दर्जनों शराब माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन समय गुजरने के साथ ही दोनों महकमों की कार्रवाई भी ढीली पड़ गई और कुछ दिनों बाद जेल में बंद शराब माफिया भी जमानत पर रिहा हो गए। अब फिर से क्षेत्र में इस कारोबार ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि जहरीली शराब कांड में शामिल लोगों ने फिर से धंधे को पर लगा दिए हैं। चंदेना कोली, लालवाला, लबकरी और करंजाली समेत दर्जनों गांवों में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब निकाली जा रही है। जिसमें हरियाणा से लाए जा रहे रेक्टीफाइड केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह वही केमिकल है जिसका इस्तेमाल कर बनाई गई शराब को पीने से 36 लोग मौत की नींद सो गए थे। कच्ची शराब के धंधे पर प्रतिबंध लगाने के लिए पूर्व में कई गांवों के लोग एसडीएम कार्यालय और कोतवाली पर प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद पुलिस ने आज तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। आरोप है कि साठगांठ के चलते पुलिस अवैध कारोबारियों पर हाथ नहीं डाल रही है। सीओ सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि वैसे तो पुलिस समय-समय पर अवैध शराब के खिलाफ अ भियान चला रही है। अवैध शराब के धंधे को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी व्यक्ति इस अवैध कारोबार में संलिप्त पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।