सहारनपुर। घोड़ों में फैलने वाली भयानक और जानलेवा बीमारी ग्लैंडर्स की जांच के लिए सहारनपुर या आसपास कोई सुविधा नहीं है। जरूरत पड़ने पर यहां से नमूने हरियाणा के हिसार स्थित राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र भेजने पड़ते हैं, जहां से रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं। तब तक ग्रसित घोड़े के संपर्क में आने वाले अन्य स्वस्थ घोड़ों में भी यह बीमारी फैल चुकी होती है।
सहारनपुर में सेना के घोड़ों को ट्रेनिंग देने के लिए सहारनपुर में रिमाउंट डिपो हैं, जहां से हर वर्ष सैकड़ों घोड़ों को प्रशिक्षित कर सेना के लिए भेजा जाता है। इसके अलावा अन्य पशुपालक भी घोड़े पाल कर अपना रोजगार करते हैं। ऐसे में यदि किसी घोड़े को ग्लैंडर्स बीमारी हो जाए तो उसकी पुष्टि के लिए नमूने को हिसार भेजना पड़ता है। क्योंकि, सहारनपुर या आसपास इसकी जांच की सुविधा नहीं है। हिसार से रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं। तब तक ग्रसित घोड़े के संपर्क आने पर अन्य गधे, घोड़े या खच्चर भी इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।
दो वर्ष जनपद में फैली इस बीमारी ने पशुपालकों को भयभीत कर दिया था। तब पशुपालन विभाग ने कई घोड़ों की जांच के लिए नमूने हिसार भेजे थे। पुष्टि होने पर कई घोड़ों को मारकर गड्ढे में दबाया गया था। इसके बाद हर माह पशुपालक विभाग 20 से 25 नमूने लेकर हिसार भेज रहा है। आसपास जांच की सुविधा नहीं होने से जहां विभाग को परेशानी होती है, वहीं पशुपालकों को भी समस्या से जूझना पड़ता है। खास बात यह है कि सहारनपुर सेना के घोड़ों का ट्रेनिंग सेंटर है। इसके बाद भी पशुओं की जांच के लिए यहां कोई लैब नहीं बनाई गई।
दो माह पहले भी दो घोड़े ग्लैंडर्स की ग्रसित मिले
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी वाईपी सिंह ने बताया गंगोह और रामपुर मनिहारान क्षेत्र के गांव जानखेड़ा में दो माह पहले दो घोड़े ग्लैंडर्स बीमारी चपेट में मिले थे। पुष्टि होने पर दोनों घोड़ों को टीका लगाकर मारना पड़ा था। इसकी एवज में पशुपालक को सरकार की ओर से आर्थिक मदद दी गई।