सहारनपुर। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और महिला अस्पताल समेत 15 स्वास्थ्य केंद्रों पर ऑक्सीजन प्लांट लगे हुए हैं। इसके बावजूद मरीजों को जरूरत पड़ने पर सिलिंडर से ऑक्सीजन दी जा रही है। स्थिति यह है कि महीने में करीब 250 से 300 ऑक्सीजन सिलिंडरों की खपत हो रही है। ऐसे में सवाल यह है कि जब ऑक्सीजन प्लांट हैं तो बाहर एजेंसियों से सिलिंडर क्यों मंगाए जा रहे हैं।
कोरोना काल के दौरान सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत हुई थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज, एसबीडी जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सीएचसी नानौता, नकुड़, रामपुर मनिहारान, फतेहपुर, सरसावा, गंगोह, जड़ौदा पांडा, रणखंडी और नागल में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए। यह प्लांट पीएम केयर फंड सहित अन्य फंड से लगाए गए। प्लांट करोड़ों की लागत से बनकर तैयार हुए। जिनकी क्षमता 250 से 850 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) है। सभी प्लांट चालू है। इसके बाद भी ऑक्सीजन सिलिंडरों की खपत में कोई कमी नहीं है।
जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में प्रतिदिन 50 से 60 ऑक्सीजन सिलिंडर लग रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि जब ऑक्सीजन प्लांट चालू स्थिति में है तो रोजाना सिलिंडर की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। इससे साफ अंदाजा लगाया जाता है कि प्लांट से वार्डों में ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो रही है।
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छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाते हैं
राजकीय मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुधीर राठी ने बताया कि तीन ऑक्सीजन प्लांट है। इनमें एक तरल ऑक्सीजन प्लांट है, जबकि दो कोरोना काल में लगे थे। तीनों चल रहे हैं। छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत मरीजों को वार्ड से शिफ्ट में पड़ती है।
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वर्जन
जिन सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं, वह चालू है। प्लांट में तकनीकी दिक्कत होने पर ही ऑक्सीजन सिलिंडरों की आवश्यकता है। इसलिए कुछ सिलिंडर रखने पड़ते हैं।
- डॉ. प्रवीण कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी