सहारनपुर/गागलहेड़ी। जहरीली शराब प्रभावित गांवों में एसआईटी के पहुंचने से पहले ही पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी गांवों में पहुंच चुके थे। मृतकों के परिजनों को घरों से लाकर प्राथमिक विद्यालय में पहुंचाया और प्रधान तथा संबंधित चौकीदार तथा कुछ प्रमुख लोगों को स्कूल में बुला लिया था, जबकि गांव के आम लोगों की भीड़ को स्कूल से दूर कर दिया गया।
एसआईटी ने पूछे यह सवाल
एसआईटी के अध्यक्ष एडीजी रेलवे संजय सिंघल, आईजी शरद शचान और मंडलायुक्त सीपी त्रिपाठी ने मृतकों के परिजनों से पूछा कि क्या काम करते हैं, पिता क्या काम करते हैं, भाई क्या काम करते हैं, कितना कमा लेते हैं, शराब कौन-कौन पीता है, शराब पीने के लिए पैसे कौन देता था, शराब कहां से लाते थे, कब से शराब पीते थे, उमाही के पिंटू के यहां शराब पीने जाते थे तो रोकते क्यों नहीं थे, क्या पता था कि पिंटू के यहां कच्ची शराब बिकती है, पिंटू के यहां शराब कहां से आती थी, गांव में कहां से शराब आती है, कौन शराब लाता है, शराब कहां निकाली जाती है, कहां बनाई जाती है, बालूपुर जाते थे या नहीं, बालूपुर में कहां काम करते थे ?
नेताओं ने भी दर्ज कराए बयान
ग्राम उमाही और शरबतपुर में जब एसआईटी पहुंची तो कुछ नेता भी वहां पहुंच गए। उमाही में पहुंचे एक नेता खुद ही एसआईटी के सामने बयान दर्ज करने के लिए कहा। उसने कहा कि गांव ही नहीं आसपास भी कहीं शराब न तो बनती है और न ही बिकती है। यहां के लोग गांव बालूपुर में मजदूरी करने जाते थे और वहीं से शराब पीकर आते थे। उस दिन भी बालुपुर से शराब पीकर और लेकर आए थे। जिसके चलते लोगों की मौत हो गई। इसी प्रकार के बयान एक नेता ने शरबतपुर में भी दिए और एसआईटी को विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि सहारनपुर में कहीं भी न तो शराब बनती है और न ही बिकती है।
एक होमगार्ड भी है शराब की सप्लाई में शामिल
ग्राम उमाही कोटा में लोगों ने गांव के पिंटू के अलावा एक होमगार्ड का नाम भी बताया। गांव के ही एक बुजुर्ग ने बताया कि पिंटू की मौत होने के बाद होमगार्ड ने भी सप्लाई बंद कर दी है। पुलिस से सेटिंग होमगार्ड ही कराता था। पुलिस के डर से कोई होमगार्ड का नाम नहीं लेता।
कैंसर के कारण पिंटू को नहीं पकड़ती थी पुलिस
पुलिस को उमाही कोटा में पिंटू द्वारा शराब बेचने की जानकारी थी। कई बार पिंटू को पकड़ने पुलिस पहुंची थी। लेकिन कैंसर की बीमारी जानकर उसे छोड़ दिया जाता था। पुलिस सूत्रों के अनुसार पुलिस को डर था कि कहीं पिंटू की हवालात में ही मौत हो गई तो पुलिस को लेने के देने पड़ जाएंगे। पिंटू पुलिस की इस कमजोरी को भांप चुका था।