सहारनपुर। स्कूलों में मिड-डे मील बनने की हकीकत जानने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेंद्र कुमार सिंह ने शुक्रवार को पुंवारका ब्लॉक के स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। किसी स्कूल में शिक्षक नहीं मिले तो कहीं बच्चे ही नहीं थे। बिना प्रक्रिया अपनाए छुट्टी मारने वाले शिक्षकों का वेतन रोकने की कार्रवाई की गई।
बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेंद्र कुमार सिंह सबसे पहले उच्च प्राथमिक विद्यालय पीकी पहुंचे, जहां 124 बच्चों के सापेक्ष मात्र 40 बच्चे उपस्थित मिले। प्रभारी प्रधान अध्यापिका सुनीता शर्मा चिकित्सा अवकाश पर थीं। सुनीता शर्मा को अवकाश को सर्विस बुक में अंकित कर प्रस्तुत होनेे को कहा गया है। इसके बाद प्राथमिक विद्यालय पीकी का निरीक्षण किया गया, जिसमें 178 बच्चों के सापेक्ष 60 बच्चे उपस्थित मिले। प्रधान अध्यापक फसहाद द्वारा छह और सात फरवरी को अवकाश रखने पर दो दिन का वेतन काटा गया। प्राथमिक विद्यालय वाजिदपुर में प्रधान अध्यापक मो. अरशद गैरहाजिर मिले। सहायक अध्यापक बुरहान छह और सात को गैरहाजिर रहे थे। पंजीकृत 54 बच्चों के सापेक्ष 12 बच्चे उपस्थित मिले। दोनों शिक्षकों का संबंधित दिनों का वेतन काटा गया। प्राथमिक विद्यालय तेलीपुरा में प्रधान अध्यापक खालिदा और सहायक अध्यापक नीतू अनुपस्थित मिलीं। दोनों छह और सात फरवरी को भी अवकाश पर थीं। स्कूल में मात्र चार बच्चे मौजूद मिले। दोनों शिक्षिकाओं का तीन-तीन दिन का वेतन काटा गया। प्राथमिक विद्यालय चाटका में में तीनों शिक्षक मौजूद थे, मगर एक भी बच्चा नहीं मिला। अलमारी की चाबी नहीं होने की बात कहते हुए रिकार्ड नहीं दिखाया गया। तीनों शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोकी गई। प्राथमिक विद्यालय चंद्रोली में में पंजीकृत 196 बच्चों के सापेक्ष 60 बच्चे मिले। बाकी सब सामान्य मिला। कक्षा में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
शिक्षकों ने कार्रवाई को गलत ठहराया
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने छह फरवरी को अनेक स्कूलों में मिड-डे मील नहीं बनने पर संबंधित स्कूलों के शिक्षकों का वेतन काटने की कार्रवाई सात फरवरी को की थी। कुछ शिक्षकों ने इस पर आपत्ति उठाई है। उनका कहना है कि उनके यहां छह फरवरी केे स्कूल खुला था और मिड-डे मील भी बना था। शिक्षक भी सभी उपस्थित थे। मगर उसके बाद भी उनके विद्यालय का नाम मिड-डे मील नहीं बनने वाले विद्यालयों की सूची में रखा गया है और वेतन काटने की कार्रवाई की गई है। उधर, बीएसए रमेंद्र कुमार का कहना है कि यदि किसी स्कूल में मिड-डे मील बना है और उसका नाम सूची में आया है तो वह प्रस्तुत होकर अपना साबित करें।