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कार्य बहिष्कार कर धरने पर रहे महाविद्यालयों के शिक्षक

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कार्य बहिष्कार कर धरने पर रहे महाविद्यालयों के शिक्षक
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सहारनपुर। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत लाभ दिए जाने समेत अनेक मांगों को लेकर महाविद्यालयों के शिक्षक सोमवार को हड़ताल पर रहे। उन्होंने कार्य का बहिष्कार करते हुए बाजुओं पर काली पट्टी बांधकर धरना दिया। सरकारों पर शिक्षक हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
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उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय, महाविद्यालय शिक्षक महासंघ यानी फुफुक्टा के आह्वान पर महाराज सिंह कॉलेज के तमाम शिक्षकों ने कार्य का बहिष्कार कर धरना दिया। प्रेस प्रवक्ता डॉ. अजय शर्मा ने कहा कि शिक्षक संघ सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कराने, इसकी विसंगतियों को दूर कराने, सेवानिवृत्ति की आयु लागू करने समेत अनेक मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष करता रहा है। मगर प्रदेश सरकार लगातार शिक्षकों की आवाज को अनसुना करती रही है। यदि समय रहते सकारात्मक निर्णय राज्य सरकार ने नहीं लिया तो शिक्षक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। धरने में डॉ. संजय कुमार, डॉ. आरबीएस रावत, डॉ. अरुण गुप्ता, डॉ. केके डे, डॉ. कमलेश कुमारी, डॉ. अजय शर्मा, डॉ. ममता विश्नोई, डॉ. पूनम यादव, डॉ. विजय मलिक, डॉ. दीपा चौहान, ओम दत्ता, निर्दोष, कपिल वत्स, डीडी गिरी, उमेशचंद आदि शामिल रहे। उधर, जेवी जैन कॉलेज के शिक्षकों ने भी शिक्षक संघ के आह्वान पर कार्य का बहिष्कार कर धरना दिया। डॉ. राजेंद्र कुमार ने कहा कि शिक्षकों की एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत है। आरोप लगाया कि प्रदेश में अभी तक रही किसी भी सरकार ने शिक्षकों के हितों के बारे में सोचा नहीं है। ऐसे में शिक्षकों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। धरने में डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. राकेश चंद्रा, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. सीमा मिश्रा, डॉ. हरवीर सिंह, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. लोकेश, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. इंदू शर्मा, डॉ. अनुजा अग्रवाल, डॉ. ब्रह्मपाल सिंह, डॉ. मनीषा, डॉ. पूनम शर्मा आदि रहीं।
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शिक्षकों की प्रमुख मांग
- सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू की जाएं।
- सभी मानदेय शिक्षकों का आमेलन अविलंब किया जाए।
- पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल किया जाए।
- शिक्षकों को सीएएस के तहत प्रोफेसर पदनाम प्रदान किया जाए।
- यूजीसी रेगुलेशन 2010 के तहत सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष की जाए।
- डिग्री कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षकों को स्थाई कर वेतन संदाय पर लिया जाए।
- परीक्षा पारिश्रमिक की दरों में वृद्धि की जाए।
- अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों को मेडिकल की सुविधा दी जाए।
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