सहारनपुर। जम्मू तवी से बिहार जाने वाली सुपरफास्ट अर्चना एक्सप्रेस का चालीस मिनट में ही दो बार इंजन के ट्रेन से अलग होने की घटना मात्र एक हादसा है या फिर साजिश। इतनी लंबी दूरी तय करने के बाद ट्रेन का कपलिंग सहारनपुर में ही खुला। ट्रेन की गति तेज होती तो सहारनपुर में बड़ा रेल हादसा हो सकता था।
सहारनपुर में पिछले छह माह में यह पांचवां मामला है जब रेल हादसा होते-होते बचा है। ट्रेन जम्मू तवी से सहारनपुर तक आराम से चली आई। सहारनपुर में जैसे ही ट्रेन की गति धीमी हुई तो इंजन से ट्रेन अलग हो गई। बताया जा रहा है कि कपलिंग खुल गए इसलिए इंजन अलग हो गया। एक बार घटना होने के बाद रेलवे इंजीनियर्स ने मौके पर पहुंचकर कमी को ठीक कर दिया और ट्रेन को रवाना कर दिया। लेकिन सहारनपुर स्टेशन से थोड़ा सा आगे चलते ही एक बार फिर से वही घटना हुई। इंजन फिर अलग हो गया।
अधिकारियों द्वारा दोनों ही बार में कपलिंग खुलने का दावा किया गया। जबकि कोई कमी होती तो कपलिंग टूटतीं। मात्र 40 मिनट के अंतराल में दो बार कपलिंग खुलने की घटना को लेकर साजिश की भी आशंका नजर आने लगी है। बेशक रेलवे अधिकारी इसे छोटी घटना मान रहे हों।
लेकिन इसा बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि सहारनपुर में छह माह में पांच ऐसी घटनाएं हो चुकीं हैं जिसमें बड़ा रेल हादसा हो सकता था। तल्हेड़ी बुजुर्ग में ट्रैक के 67 कपलिंग खुले हुए पाए गए थे। ढमोला पुल के निकट पटरी कटी हुई पाई गई थी। रामपुरा मनिहारन में तो ट्रेन पलटने की साजिश के चलते लोहे का बड़ा गार्डर ही ट्रैक पर रख दिया गया था। सरसावा में कई बोगियां ट्रैक से उतर गईं थीं। सहारनपुर स्टेशन अधीक्षक को चिट्ठी लिखकर रेलवे स्टेशन को उड़ाने एवं बड़ी रेल दुर्घटना किए जाने की धमकी दी थी। अब दो बार कपलिंग खुलने का मामला। चालीस मिनट में दो बार कपलिंग खुलने का मामला हादसा है या साजिश, कपलिंग खुल गईं या खोल दी गईं, किसकी लापरवाही रही यह तो रेलवे अधिकारियों की जांच टीम की रिपोर्ट के बाद ही पता चल सकेगा। लेकिन घटना के बाद से अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।
अधिकारियों की लापरवाही से हुई दोबारा घटना
अर्चना एक्सप्रेस में एक बार कपलिंग खुलने के बाद पिलखनी में उसको ठीक कर दिया गया। इसकी सूचना रेलवे के उच्चाधिकारियों को भी दी गई। जिसके लिए अंबाला से जांच टीम सहारनपुर के लिए रवाना हो चगई, लेकिन सहारनपुर के अधिका री सोते ही रहे। स्टेशत्नन अधिकारियों से लेकर किसी भी इंजीनियर ने ट्रेन में आई तकनीकी खामी के बारे में न तो जाननेह का प्रयास किया और न ही उसकी जांच ही की। एक बार घटना के बावजूद ट्रेन को आगे के लिए रवाना कर दिया।