शुगर रिकवरी के बाद गन्ना पेराई में भी तोडे़ जिले की मिलों ने रिकार्ड
सहारनपुर। शुगर रिकवरी में रिकार्ड बनाने के बाद जिले की चीनी मिलों ने गन्ना पेराई में भी पिछले रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। जिले की चीनी मिलें 19 मार्च तक 362.85 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर चुकी है। जबकि गत वर्ष जिले में 357 लाख गन्ने की ही पेराई की थी। जनपद की चीनी मिलों के अभी पूरे अप्रैल माह चलने की उम्मीद है। अनुमान है कि इस बार गन्ना पेराई 450 लाख क्विंटल तक पहुंच सकती है।
गन्ना विभाग द्वारा किसानों की जागरूकता के लिए चलाए गए अभियान के रिजल्ट आने शुरू हो गए हैं। इसके चलते जहां इस बार शुगर रिकवरी में रिकार्ड बनाने के बाद गन्ना पेराई में भी जिले की चीनी मिलों ने पुराने रिकार्ड को तोड़ दिया है। पिछले दो वर्षों से गन्ना विभाग द्वारा गन्ना प्रजाति बदलाव और गन्ना बुआई की ट्रेंच विधि को अपनाने के लिए गांव गांव जाकर गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है। जिससे इस बार गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ने के साथ ही उत्पादन में भी खासी बढ़ोत्तरी दिखाई दे रही है। प्रजाति बदलाव के तहत किसानों को रिजेक्ट वैरायटी के स्थान पर अगेती प्रजातियों की बुआई के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। इसके चलते इस बार जहां जिले की मिलों ने शुगर रिकवरी में कीर्तिमान स्थापित किया है वहीं गन्ना पेराई ने भी पिछले तमाम रिकार्डों को ध्वस्त कर दिए हैं। इस बार जिले में औसत शुगर रिकवरी 10.30 प्रतिशत है जबकि देवबंद में इस समय चीनी परता 12.30 फीसदी आ रहा है।
पिछले वर्षों के गन्ना पेराई के आंकड़े
पेराई सत्र-------- पेराई (लाख कुंतल)
2012-13-------- 353
2013-14--------- 264
2014-15--------- 295
2015-16--------- 216
2016-17--------- 357
2017-18--------- 362 अब तक
मिलवार अब तक की पेराई (लाख कुंतल में)
देवबंद ------------113.63
शेरमऊ----------- 76.67
गांगनौली--------- 72.07
गागलहेडी---------- 11.80
नानौता------------ 57.29
सरसावा------------ 31.39
गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार
बीज और प्रजाति बदलाव के चलते इस बार जिले में गन्ने का बंपर उत्पादन हो रहा है। जिससे मिलों में गन्ना पेराई के पिछले रिकार्ड टूट गए हैं। 19 मार्च तक जिले की चीनी मिलें 362.85 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर चुकी हैं। जबकि किसानों के खेतों में अभी भी काफी गन्ना खड़ा है। उम्मीद है कि इस बार 450 लाख क्विंटल तक गन्ना पेराई हो सकती है।
- डॉ. आरडी द्विवेदी, जिला गन्ना अधिकारी।