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जलकल विभाग के फर्जी बिल मामले में जेल गए पालिकाध्यक्ष

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देवबंद (सहारनपुर)। वर्ष 2003 में नगरपालिका के जलकल विभाग में हुए फर्जी बिल मामले में चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी को मंगलवार को जेल जाना पड़ा। सीजेएम डा. दीनानाथ की अदालत ने पेशी के बाद अंसारी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। बुधवार को एडीजे बबीता रानी की अदालत में अर्जी पर सुनवाई होगी।
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जलकल विभाग के फर्जी बिल मामले में शासन द्वारा पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी के खिलाफ लाखों का घोटाला साबित होने के बाद पुलिस ने एसडीएम की शिकायत पर पालिकाध्यक्ष के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। अदालत में पेश न होने के चलते कोर्ट ने पालिकाध्यक्ष को कई बार समन भेजा। सितंबर 2017 में अंसारी द्वारा हाईकोर्ट में स्टे लेने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया। हाईकोर्ट ने उन्हें कोर्ट में पेश होने के लिए 45 दिन का समय दिया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पालिकाध्यक्ष के 16 मार्च तक कोर्ट में पेश न होने पर कुर्की के आदेश दिए थे। इसी बीच पालिकाध्यक्ष ने फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने सीजेएम कोर्ट सहारनपुर के आदेश पर रोक लगाते हुए अंसारी को 26 मार्च तक सीजेएम कोर्ट में पेश होकर जमानत कराने के आदेश दिए थे। मंगलवार को पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी सीजेएम डा. दीनानाथ की अदालत में पेश हुए और जमानत अर्जी दी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद अर्जी खारिज कर दी। पालिकाध्यक्ष ने इसके बाद एडीजे बबीता रानी की अदालत में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया है। बाद में पालिकाध्यक्ष को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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