वार्षिकोत्सव में ब्रह्मचारियों ने रोमांचक करतब दिखाए
अंबेहटा (सहारनपुर)। दयानंद आदर्श विद्यापीठ गुरुकुल कम्हेड़ा में चल रहे दूसरे वार्षिकोत्सव का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन विद्वानों ने वेदों के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने अनेक योग क्रियाओं का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में आचार्य विरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वेदों के प्रचार-प्रचार के बिना देश और समाज के कल्याण की कल्पना बेकार है क्योंकि वेद ही ऐसे ग्रंथ हैं जो मनुष्य को मनुष्य बनने का संदेश देते हैं। उन्होंने बताया कि धर्म केवल एक ही है जो सत्य सनातन वैदिक धर्म है। शास्त्री ने बताया कि धर्म जोड़ता है। उन्होंने कहा कि आज धर्म के नाम पर तरह-तरह के आडंबर रचे जा रहे हैं। मानव इन आडंबरों में फंस कर धर्म के वास्तविक स्वरूप से दूर होता जा रहा है। यह चिंता की बात है।
नालंदा बिहार से आए आचार्य देवव्रत ने कहा कि आर्य समाज ही ऐसी संस्था है। उसे देश, धर्म और संस्कृति की चिंता है। केवल आर्य समाज के मंच से ही राष्ट्र रक्षा की बात की जाती है। प्रसिद्ध भजनोपदेशक कुलदीप विद्यार्थी, रूहेल सिंह आर्य वीर और कल्याणवीर ने भी भजनों के माध्यम से देश के हालात पर चिंता जताई। कार्यक्रम में गुरुकुल के वंश, रोहित आर्य, आकाश, विशाल, आर्यमान, ओम आर्य, विवेक आर्य, देवराज, वंशराज आर्य आदि ब्रह्मचारियों ने मलखंभ, जिम्नास्टिक, लाठी चलाना, कांच पीसना, आंख और गले से सरिया मोड़ना आदि योग क्रियाओं का प्रदर्शन कर तालियां बटोरीं।
संचालन सुनील शास्त्री ने किया। कार्यक्रम में गंगोह विधायक प्रदीप चौधरी, संजय कम्हेड़ा, विपिन आर्य, मनोज आर्य, सरदार सिंह, रघुनाथ चौहान, सुभाष कश्यप, अर्पित आर्य, निशांत मित्तल, महिपाल सिंह, कृष्ण दत्त, इसम सिंह, बिरम सिंह, सत्यार्थी आर्य सहित बड़ी संख्या में आर्य समाज के लोग मौजूद रहे।