श्रद्धानंद बलिदान दिवस मनाया
अंबेहटा। वैदिक संस्कृति उत्थान न्यास एवं आर्य समाज खेड़ा अफगान के संयुक्त तत्वावधान में स्वामी श्रद्धानंद का बलिदान दिवस मनाया गया। वक्ताओं ने स्वामी जी के जीवन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में असहाय लोगों को कंबल वितरित किए गए।
आर्य समाज मंदिर में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। यज्ञमान श्रवण कुमार रहे। यज्ञ के बाद न्यास के अध्यक्ष आदित्य प्रसाद गुप्ता ने कहा कि आर्य समाज का इतिहास कुर्बानियों से भरा पड़ा है। बलिदान की इसी श्रंखला में स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान और कार्यों को देश सम्मान से स्मरण करता है। बताया कि 1936 में मुंशीराम नामक एक व्यक्ति की स्वामी दयानंद सरस्वती से भेंट हुई। उस समय मुंशीराम का जीवन बुराइयों से भरा पड़ा था। दयानंद सरस्वती के संपर्क में आने पर मुंशीराम का जीवन बदल गया। वे संन्यास लेकर स्वामी श्रद्धानंद बन गए। आदित्य प्रकाश ने बताया कि उन्होंने अपना सारा जीवन आर्य के कार्यों में लगा दिया। गुरुकुल कांगडी जैसे विश्व प्रसिद्व संस्था की स्थापना की। न्यास के सचिव वेदभूषण गुप्ता ने न्यास के कार्यों पर प्रकाश डाला। इस मौके पर 30 जरूरतमंद लोगों को निशुल्क कंबल दिए गए। वीरेद्र कुमार, मंत्री राजेश कुमार, चरण सिंह, जगदीश, कुंवरपाल आर्य, राजपाल, सत्यपाल, कुसुम, धन्नो, अर्जुन कुमार,अशोक कुमार, मोनू, रामकिशन, श्यामलाल आदि उपस्थित रहे।