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बिना जेलर के चल रहा सहारनपुर का जिला कारागार

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बिना जेलर के चल रहा सहारनपुर का जिला कारागार
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सहारनपुर। वर्तमान में प्रदेश के सबसे संवेदनशील जिला माने जा रहे सहारनपुर के जिला कारागार में इतना बवाल होने के बावजूद जेलर ही नियुक्त नहीं किया गया। सुरक्षा के नाम पर यहां फोर्स भी आधा ही नियुक्त किया गया है। जबकि बवाल के मामले के दोनों पक्षों के आरोपी जेल में ही हैं और दोनों ही पक्षों के लोग एक साथ मिलने के लिए आ रहे हैं। ऐसे में किसी भी दिन किसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
दो माह से हो रहे बवाल ने सहारनपुर को संवेदनशील जिला बना दिया है। पहले सांप्रदायिक बवाल हुआ और फिर जातीय बवाल हुआ। एक के बाद एक करके चार पांच संघर्ष और बवाल की घटनाओं में दोनों पक्षों के 100 से अधिक लोग जेल भेजे जा चुके हैं। जिससे जेल भी पूरी तरह से संवेदनशील बनी हुई है। जिन लोगों ने आपस में बवाल किया, वे जेल में हैं। यही नहीं दोनों ही पक्षों के बंदियों से मिलने वालों की भी जेल के बाहर और अंदर भीड़ लगी हुई है। ऐसे में जेल के अंदर भी तनाव की स्थिति बनी हुई है।
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जिला कारागार में इतनी विस्फोटक स्थिति होने के बावजूद सुरक्षा और व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हैं। यहां तक कि इतने महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील हो चुके जिला कारागार में जेलर तक नियुक्त नहीं किया गया है। एक जेल अधीक्षक और एक डिप्टी जेलर के भरोसे पूरा जिला कारागार चल रहा है। सहारनपुर का मामला विधानसभा तक गूंज रहा है, लेकिन जेल में संवेदनशील मामले के बंदियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अधिकारियों की तैनाती नहीं की गई। लगभग एक साल से यहां जेलर तो है ही नहीं, सुरक्षा कर्मियों तथा अन्य स्टाफ भी आधा ही है। बताया जा रहा है कि सौ से अधिक सिपाहियों की तैनाती वाले जिला कारागार में मात्र 40 सिपाही हैं।
शासन ने हाल में ही लगभग 17-18 जेलरों के स्थानांतरण एक जेल से दूसरे जेल के लिए किए हैं, लेकिन सहारनपुर जिला कारागार के लिए न तो कोई जेलर भेजा गया और न ही कोई अन्य डिप्टी जेलर भेजा गया।
अधिकारियों के न होने से जेल की व्यवस्था राम भरोसे हो चुकी है। दो दिन पूर्व ही 23 मई को हमले के आरोप में जेल में बंद 8 निर्दोष पाए गए लोगों को रिहा करना था। जिनमें रोहित पुत्र चंद्रपाल की बजाय रोहित पुत्र राकेश को छोड़ दिया गया। जैसे ही पता चला तो जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। बाद में पुलिस भेजकर बाजार से रोहित को पकड़ा और दूसरे रोहित को छोड़ा गया।
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डीएम के राडार पर है जेल के अफसर
जेल में तैनात अधिकारियों और बंदियों की शिकायत के बाद डीएम ने इन्हें अपने रडार पर ले लिया है। डीएम पीके पांडेय को सूचना मिली है कि जेल के अंदर बंदियों को सांठगांठ के जरिए वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। हिंसा के प्रमुख आरोपी चंद्रशेेखर को भी तमाम तरह की सुविधाएं दिए जाने की सूचना है। इसके अलावा जेल मैन्युअल पालन नहीं करने की शिकायतें आ रही हैं। जिलाधिकारी पीके पांडेय ने बताया कि शिकायतों की जांच कराई जा रही है। यदि इसमें सत्यता पाई गई तो निलंबन की संस्तुति की जाएगी।
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