सहारनपुर। आत्मानुभवी जी महाराज ने कहा है कि अध्यात्मिक गतिविधियां ही मन को संतोष और आत्मा को संतुष्टि दे सकती हैं। तभी मनुष्य को आत्मिक शांति मिलती है। परमात्मा का सच्चा नाम ही नित्य निरंतर सुख, प्रसन्नता और आनंद प्रदान करता है।
आत्मानुभवी जी महाराज शुक्रवार को आवास विकास स्थित हरि मंदिर में चल रही भागवत ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं के समक्ष प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत ज्ञान आध्यात्मिक, नैतिक एवं चारित्रिक उत्थान की शिक्षा का केंद्र बिंदु है। उसी से मनुष्य के मन का रूपांतरण होता है। भारत भूमि धन्य है जहां अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया। जिनका ज्ञान ही संपूर्ण मानव जाति का मार्गदर्शन और उत्थान कर सकता है। भारत का इतिहास, सभ्यता, संस्कृति और मर्यादा पूरे विश्व पर छाई हुई है। उन्होंने शुकदेव जी के भक्ति ज्ञान वैराग्य के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि संयम योगी साधक का सर्वोत्तम लक्षण है। जो मन वाणी एवं इंद्रियों का संयम नहीं कर सकता। वह कभी ध्यान योग में निपुणता प्राप्त नहीं कर सकता। संयम से ही संकल्प शक्ति का जन्म होता है। संयम गृहस्थ जीवन के सुख का मूल आधार है। जिस प्रकार पारस के संग में लोहा भी सोना बन जाता है, उसी प्रकार आध्यात्मिक संगीत से नास्तिक, पानी और दुराचारी मनुष्य भी श्रेष्ठ उत्तम मानव बन जाता है। मनुष्य का मन ही बंधन और मोक्ष का कारण है। जहां भौतिकता की चकाचौंध में फंसा मन दुखी और अशांत रहता है, वहीं धार्मिक गतिविधियों में लगा हुआ मन सदैव प्रसन्न एवं आनंदित रहता है। भगवान के नाम का सुमिरन से ही मन का वशीकरण हो सकता है। इस मौके पर मुख्य अतिथि अनुभव अग्रवाल ने भागवत पूजन कर महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में डाक्टर रविदत्त शर्मा, कंवर सिंह यादव, हरीश चावला, मोहन, प्रभात शर्मा, तिलकराज पाराशर, गीता किरन, महिमा, कीर्ति, शगुन मौजूद रहे।